नई दिल्ली

अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी का लोगो जारी

लोगो में भगवा-केसरिया पृष्ठभूमि, स्वर्णिम वलय, श्रीराम मंदिर और उसके साथ लहराता भगवा ध्वज शामिल है। विहिप के अनुसार भगवा रंग त्याग, तपस्या, आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रधर्म के प्रति समर्पण का प्रतीक है, जबकि स्वर्णिम वलय भारतीय ज्ञान परंपरा की शाश्वतता और गौरव को दर्शाता है
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Ashok Singhal

नई दिल्ली। विश्व हिन्दू परिषद ने राम मंदिर आंदोलन के अगुआ रहे अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी वर्ष के लिए विशेष लोगो जारी किया है। विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा ने बुधवार को लोगो जारी करते हुए इसे सिंघल के आध्यात्मिक संस्कार, हिंदू समाज के गौरव-जागरण और भारतीय संस्कृति के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक बताया।

लोगो में श्रीराम मंदिर और भगवा ध्वज

लोगो में भगवा-केसरिया पृष्ठभूमि, स्वर्णिम वलय, श्रीराम मंदिर और उसके साथ लहराता भगवा ध्वज शामिल है। विहिप के अनुसार भगवा रंग त्याग, तपस्या, आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रधर्म के प्रति समर्पण का प्रतीक है, जबकि स्वर्णिम वलय भारतीय ज्ञान परंपरा की शाश्वतता और गौरव को दर्शाता है। श्रीराम मंदिर को सिंघल के जीवन के प्रमुख ध्येय और श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में उनके योगदान से जोड़ा गया है। लोगो के केंद्र में अशोक सिंघल का चित्र है। विहिप के मुताबिक उनका तिलक और श्वेत वस्त्र सादगी, आध्यात्मिक आस्था और भारतीय जीवन-मूल्यों के प्रति निष्ठा का संदेश देते हैं। नाम को उभारता लाल-मरून पट्टा ऊर्जा, साहस और संकल्प का प्रतीक बताया गया है।

27 सितंबर से जन्म शताब्दी वर्ष

विहिप के अनुसार अशोक सिंघल का जन्म 27 सितंबर 1926 को हुआ था। 27 सितंबर 2026 को उनके जन्म के 100 वर्ष पूरे होंगे। जन्म शताब्दी वर्ष के दौरान लोगो का इस्तेमाल विहिप के विभिन्न कार्यक्रमों, प्रकाशनों, डिजिटल माध्यमों और जनसंपर्क अभियानों में किया जाएगा। संगठन का कहना है कि इसके जरिए सिंघल के विचारों और कार्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ सेवा, संगठन, संस्कार और सांस्कृतिक चेतना के संदेश को आगे बढ़ाया जाएगा।

Updated on:
17 Sept 2026 12:47 pm
Published on:
17 Sept 2026 12:47 pm