नई दिल्ली

लोकसभा में हनुमान बेनीवाल के सवाल पर मनोहरलाल खट्टर का जवाब: अनिवार्य नहीं स्मार्ट प्री-पेड मीटर

नई दिल्ली। देश में बिजली के स्मार्ट मीटर को लेकर घमासान मचा हुआ है। राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों में स्मार्ट मीटर के साथ प्री-पेड मीटर लगाने का जमकर विरोध हुआ है। इस बीच केन्द्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने लोकसभा में साफ कहा है कि प्री-पेड मीटर लगवाना अनिवार्य नहीं […]

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नई दिल्ली। देश में बिजली के स्मार्ट मीटर को लेकर घमासान मचा हुआ है। राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों में स्मार्ट मीटर के साथ प्री-पेड मीटर लगाने का जमकर विरोध हुआ है। इस बीच केन्द्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने लोकसभा में साफ कहा है कि प्री-पेड मीटर लगवाना अनिवार्य नहीं है, बल्कि यह वैकल्पिक व्यवस्था है। मंत्री के बयान के इतर, राज्यों में स्थिति जबरन से प्री-पेड स्मार्ट मीटर लगवाने की दिख रही है। देशभर में 6.13 करोड़ स्मार्ट मीटर लग चुके हैं, जिनमें से 2.25 करोड़ प्री-पेड है।

दरअसल, लोकसभा के प्रश्नकाल में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल व आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष व सांसद चन्द्रशेखर आजाद रावण ने जबरन स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने से होने वाली समस्याओं को लेकर सवाल उठाया। इस पर विद्युत मंत्री खट्टर ने कहा कि किसी भी प्रदेश से हमें प्रीपेड मीटर जबरन लगाने की शिकायत नहीं मिली है। यदि कोई शिकायत मिलेगी तो हम संज्ञान लेंगे। खट्टर ने साफ कर दिया कि केन्द्र सरकार सिर्फ गाइडलाइंस देती है, जबकि लगाना के काम राज्य सरकार करती है। उन्होंने दोहराया कि प्री पेड मीटर लगवाना अनिवार्य नहीं है, लेकिन इसके लगवाने के कई लाभ है।

कंपनियां घाटे में, जिसके चलते प्री-पेड मीट स्कीम लाए

मंत्री खट्टर ने कहा कि हमारी कंपनियां कामर्शियल है, सेवा के लिए नहीं है। 2017 में 7 लाख करोड़ रुपए के घाटे में विद्युत कंपनियां थी, तब राज्यों ने उदय स्कीम के तहत कंपनियों को टेकओवर कर बांड जारी किए। आज फिर से कंपनियां 7 लाख करोड़ घाटे में पहुंच गई है। इसलिए बिजली का बिल लेने के लिए स्मार्ट मीटर और प्री पेड मीटर की व्यवस्था की गई।

ऐसा कौन सा यंत्र, जिससे बढ़ जाता है चार गुना बिल-तिवारी

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने पूरक सवाल करते हुए कहा कि जिन इलाकों में बिजली का निजीकरण हुआ है। वहां बिजली के बिल बढ़ गए। स्मार्ट मीटर में ऐसा कौन सा यंत्र लगा हुआ है, जिससे चार गुना तक बिल बढ़ जाता है। स्मार्ट मीटर को लेकर सरकार की स्टडी को लेकर तिवारी ने सवाल पूछा। इसके जवाब में मंत्री खट्टर ने कहा कि पिछले साल ऐसा पहली बार हुआ है, जबकि 49 कंपनियों को 2600 करोड़ रुपए का लाभ हुआ है।

सरकार के दो तरह के जवाब, जिससे विरोधाभास

स्मार्ट मीटर को लेकर सरकार ने लिखित जवाब दिया है, जिसमें दो तरह की जानकारी दी गई है। इसके चलते विरोधाभास की स्थिति बनी हुई है। सांसद चन्द्रशेखर आजाद ने इस पर सवाल भी उठाया है।

1. उपभोक्ता के अनुरोध पर ही स्मार्ट मीटर

विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ताओं को प्रीपेड मीटर चुनने का विकल्प दिया गया है। यानी किसी भी उपभोक्ता पर इसे जबरन लागू करने का प्रावधान नहीं है। उपभोक्ता के अनुरोध पर वितरण लाइसेंसधारी उपभोक्ता को प्री पेड मीटर दिए जाएंगे, जिसके लिए सुरक्षा राशि की जरूरत नहीं होगी।

2. प्री पेमेंट सुविधा शामिल होगी

सेन्ट्रल इलेक्ट्रिसिटी ऑथीरिटी (मीटरों की स्थापना व संचालन) (संशोधन) विनियम 2022 के तहत केन्द्र सरकार की ओर से तय समय सीमा में स्मार्ट मीटर से विद्युत आपूर्ति होगी। यह भी प्रावधान किया गया है कि एडवांस्ड मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में प्री पेमेंट सुविधा शामिल होगी।

3. विद्युत (उपभोक्ता अधिकार) नियम

2020 में यह व्यवस्था की गई है कि नए बिजली कनेक्शन केवल स्मार्ट प्रीपेड या प्रीपेड मीटर के साथ ही दिए जाएंगे।

टॉप टेन राज्य, जहां स्मार्ट मीटर ज्यादा लगे (28 फरवरी 2026 तक)

प्रदेश लग चुके स्मार्ट मीटर की संख्या (लाखों में)
महाराष्ट्र 95.31
उत्तर प्रदेश 90.29
बिहार 89.27
असम 55.78
गुजरात 41.30
मध्यप्रदेश 39.79
छत्तीसगढ़ 36.31
राजस्थान 35.64
आंध्र प्रदेश 26.03
पंजाब 20.88
Published on:
03 Apr 2026 11:44 am
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