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शराब के नशे में दोस्त की ईंट से हत्या, दिल्ली हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा घटाकर 8 साल की, जानिए क्यों नहीं माना इसे मर्डर

Murder in Drunken State: दिल्ली हाईकोर्ट ने दो दोस्तों के बीच लड़ाई के मामले में एक ऐसा अनोखा फैसला सुनाया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। दरअसल, दोनों दोस्त एक साथ बैठकर शराब पी रहे थे। इसी बीच शराब के पैसे देने को लेकर दोनों में बहस शुरू हो गई। नशे में धुत होने के कारण उनका यह मामूली सा झगड़ा देखते ही देखते खूनी खेल में बदल गया।

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Delhi High Court

photo ani

Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अनोखे मामले में हत्या के दोषी की उम्रकैद की सजा को घटाकर 8 साल की सश्रम कैद में बदल दिया है। दो दोस्तों ने पहले साथ बैठकर शराब पी, फिर पैसों को लेकर हुए झगड़े में एक ने दूसरे की ईंट से कुचलकर जान ले ली। सारे सबूत खिलाफ होने के बाद भी कोर्ट ने इसे हत्या नहीं, बल्कि अचानक गुस्से में की गई गैर-इरादतन हत्या माना है।

'घटना गुस्से का नतीजा थी'

गुस्से में आकर एक दोस्त ने दूसरे दोस्त पर ईंट से ताबड़तोड़ कई बार हमला कर दिया। ईंट के इन बार-बार के वार से दूसरे दोस्त की मौके पर ही मौत हो गई। जब यह मामला अदालत पहुंचा, तो दिल्ली हाईकोर्ट ने नशे में हुई इस कहासुनी और मारपीट के हालात को देखते हुए दोषी को हत्या का अपराधी नहीं माना। कोर्ट ने इस मामले को गैर-इरादतन हत्या बिना किसी पुरानी योजना या इरादे के हुई मौत में बदल दिया। हाईकोर्ट का कहना था कि यह घटना अचानक आए गुस्से का नतीजा थी, इसके लिए पहले से कोई प्लानिंग नहीं की गई थी।

कोर्ट की पीठ और सरकारी वकील के बीच क्या रहे तर्क?

इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ कर रही थी। अदालत ने कानूनी बारीकियों को समझाते हुए फैसला सुनाया कि यह मामला भारतीय दंड संहिता IPC की धारा 302 के तहत नहीं आता, बल्कि इसे धारा 304 भाग II गैर-इरादतन हत्या के तहत माना जाएगा। अदालत ने कहा कि भले ही आरोपी को इस बात की समझ या जानकारी थी कि ईंट मारने से किसी की जान जा सकती है, लेकिन उसका मकसद या इरादा अपने दोस्त की हत्या करना बिल्कुल नहीं था।

सरकारी वकील इसे गंभीर अपराध मान रहे थे

दूसरी तरफ, सरकारी वकील ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि आरोपी और मृतक आपस में गहरे दोस्त थे। घटना वाले दिन दोनों ने साथ बैठकर शराब पी थी। विवाद सिर्फ शराब के पैसे चुकाने को लेकर हुआ था। इसी झगड़े के दौरान आरोपी ने मृतक पर ईंट से बार-बार वार किए, जिससे उसकी जान चली गई। इसलिए सरकारी वकील इसे गंभीर अपराध मान रहे थे।

गुस्से में यह वारदात हो गई?

मामले के सभी पहलुओं और हालातों की बारीकी से जांच करने के बाद हाईकोर्ट की पीठ ने एक बेहद जरूरी बात कही। कोर्ट ने कहा कि यहां असली सवाल यह नहीं है कि आरोपी ने मृतक की जान ली या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि क्या उसने ऐसा किसी हत्या के इरादे से किया था या फिर अचानक गुस्से में आकर यह वारदात हो गई?

'हमला शराब के नशे में अचानक हो गया'

पीठ ने पाया कि दोनों दोस्तों के बीच पहले से कोई दुश्मनी या रंजिश नहीं थी। आरोपी ने पहले से अपने दोस्त को मारने की कोई योजना नहीं बनाई थी। अपने इस फैसले को मजबूत करने के लिए हाईकोर्ट की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों और फैसलों का हवाला भी दिया। अदालत ने साफ माना कि आरोपी ने जो हमला किया, वह ज्यादा तेज गुस्से और शराब के नशे की हालत में अचानक किया गया था, न कि किसी सोची-समझी साजिश के तहत। इसी ठोस आधार पर कोर्ट ने दोषी की उम्रकैद की सजा को कम कर दिया और उसे 8 साल की सश्रम कड़े श्रम के साथ कैद की सजा सुनाई।

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