
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी, अल-नीनो की आशंका और मानसून में 12 फीसदी की कमी के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मोदी सरकार संकट की हर परिस्थिति में किसानों के साथ चट्टान की तरह खड़ी है। राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026-27 के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा कि किसानों को खाद, बीज और वित्तीय संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी और अंतरराष्ट्रीय महंगाई का बोझ भी किसानों पर नहीं डाला जाएगा।
चौहान ने बताया कि रबी के लिए राज्यों ने 380 लाख मीट्रिक टन खाद की मांग की है, जबकि देश में अभी 163 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक का भंडार है। पिछले साल इसी समय यह स्टॉक 122 लाख मीट्रिक टन था। डीएपी और यूरिया की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ राज्यों से लगातार समन्वय किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2015 के बाद भारतीय कृषि में तेज बदलाव आया है।
उन्होंने बताया कि 2025-26 के लिए फसल उत्पादन का 362.60 मिलियन टन का लक्ष्य रखा था, जिसके मुकाबले किसानों ने 376.56 मिलियन टन खाद्यान्न का बंपर उत्पादन करके दिखाया। 2026-27 में अल-नीनो की परिस्थितियों का वैज्ञानिक आकलन करते हुए देश के लिए कुल 373.93 मिलियन टन का लक्ष्य रखा गया है। इसमें अकेले रबी सीजन का लक्ष्य 177.72 मिलियन टन तय किया गया है। उन्होंने बताया कि किसानों की लागत घटाने के लिए 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक ‘खेत बचाओ अभियान’ चलेगा। एमएसपी से नीचे दाम जाने पर दाल-तिलहन की खरीद के लिए नेफेड और एनसीसीएफ सीधे मंडियों में उतरेंगे, राज्यों की देरी का इंतजार नहीं करेंगे। आरकेवीवाई और कृषोन्नति योजना में 7000 करोड़ रुपए से अधिक राज्यों को दिए जा चुके हैं।
वर्ष खाद्यान्न उत्पादन की औसत वार्षिक वृद्धि दर (मिलियन टन)
1967-95 4.1
1996-2014 3.9
2015 के बाद 8.4
शिवराज ने कहा कि अल-नीनो और कम बारिश के बावजूद खरीफ रकबे में सिर्फ एक फीसदी कमी आई। धान का रकबा 16.32 लाख हेक्टेयर घटा, जबकि उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी और अरहर का रकबा बढ़ा। कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में करीब 6.11 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है।
पराली के मुद्दे पर चौहान ने कहा कि प्रदूषण में इसका योगदान 2019-20 के करीब सात फीसदी से घटकर अब 2.5 फीसदी रह गया है। उन्होंने कहा कि किसानों को प्रदूषण का खलनायक बनाकर प्रताडि़त करना उचित नहीं है। समाधान संवाद, सहयोग और आधुनिक मशीनरी से निकलेगा।