
नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र गुरुवार को तल्खी और गतिरोध के बीच खत्म हो गया। पूरे सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव इतना हावी रहा कि संसद में देश के कई ज्वलंत मुद्दों के साथ कानून बनाने की प्रक्रिया पर गंभीर चर्चा नहीं हो सकी। ऐसे में जनता के करीब 175 करोड़ रुपए हंगामे की भेंट चढ़ गए। वहीं सत्र के आखिरी दिन राज्यसभा में खान से जुड़ा विधेयक पारित हुआ।
दरअसल, संसद के मानसून सत्र की शुरुआत शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक के मुद्दे पर हंगामे से हुई। वहीं सत्र का समापन छात्र आंदोलन पर पुलिस बल और राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर चर्चा की मांग पर हंगामे से हो गया। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष का रवैया अडिय़ल बना रहा। ऐसे में अधिकांश समय हंगामा और शोर शराबा हुआ, जिसकी वजह से प्रश्नकाल बाधित रहा। जबकि विधेयक तो पारित हुए, लेकिन उन पर चर्चा नहीं हो सकी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि सत्र में संसद से कुल 12 विधेयक पारित हुए। लोकसभा में केवल 19 फीसदी और राज्यसभा में 39 फीसदी कामकाज हुआ। यानी लोकसभा के लिए निर्धारित समय का बड़ा हिस्सा हंगामे, नारेबाजी और स्थगन की भेंट चढ़ गया।
संसद को चलाने के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपए प्रति घंटा खर्च होता है और एक-एक मिनट का लगभग ढाई लाख रुपए। यानी एक दिन में करीब 9 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। मानसून सत्र में 19 बैठकें हुई, यानी करीब 172 करोड़ से अधिक का खर्च सांसदों पर किया गया।
मॉनसून सत्र के आखिरी दिन गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही पहली बार पूरे वंदे मातरम के साथ शुरू हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और सभी सांसद मौजूद रहे। वंदे मातरम के छह स्टैंजा बजाए जाने के बाद, लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई और सत्र समाप्त हो गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से वंदे मातरम् को कानूनी सुरक्षा देने वाले कानून को मंजूरी देने के बाद यह कदम उठाया गया है।
मानसून सत्र के दौरान सिर्फ एंटी पेपर लीक संशोधन बिल पर लोकसभा और राज्यसभा में चर्चा हो सकी है। बाकी सभी बिल बिना चर्चा के पारित किए गए।