
Nashik Conversion Case: देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के नासिक कार्यालय से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी ने आरोप लगाया है कि ऑफिस के भीतर साल 2021 से यौन शोषण और जबरन धर्मांतरण का काला खेल चल रहा था। आरोपों के मुताबिक, महिला कर्मचारियों को न केवल धर्म बदलने के लिए उकसाया जाता था, बल्कि इसके लिए बकायदा फंडिंग भी की जा रही थी।
शिकायतकर्ताओं ने 'एनडीटीवी' से बातचीत में सनसनीखेज खुलासे किए हैं। आरोप है कि ऑफिस की एक महिला एचआर मैनेजर, जिन्हें 'लेडी कैप्टन' कहा जाता था, इस पूरे नेक्सस की मुख्य कड़ी थीं। वे पहले नई हिंदू लड़कियों से दोस्ती कर उन्हें विश्वास में लेती थीं और फिर धीरे-धीरे उन पर हिजाब पहनने और नमाज पढ़ने का दबाव बनाया जाता था। चश्मदीद के अनुसार, इस काम के लिए एचआर मैडम को अलग से फंड भी मिलता था।
पीड़ितों का कहना है कि यह केवल सलाह तक सीमित नहीं था। जो लड़कियां इस प्रक्रिया का विरोध करती थीं, उन्हें करियर बर्बाद करने और नौकरी से निकालने की धमकियां दी जाती थीं। उन्हें बार-बार कहा जाता था कि वे हिंदू लड़कियों को अपनी दोस्त बनाएं, उनका धर्म बदलवाएं और केवल अपने मजहब का प्रचार करें।
मामले की गंभीरता को देखते हुए टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने इस पूरी घटना को 'अत्यधिक पीड़ादायक' बताया है। कंपनी ने मामले की आंतरिक जांच के आदेश दे दिए हैं। चंद्रशेखरन ने आश्वासन दिया है कि वर्कप्लेस पर किसी भी तरह की अनैतिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, इस घटना ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या कॉरपोरेट ऑफिस जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थान भी अब कट्टरपंथी साजिशों का केंद्र बन रहे हैं?
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने आंतरिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं और कंपनी ने स्पष्ट किया है कि अनैतिक व्यवहार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जाएगी। प्राथमिक कार्रवाई के तौर पर संबंधित महिला एचआर मैनेजर और आरोपों के घेरे में आए अन्य संदिग्ध कर्मचारियों को जांच पूरी होने तक निलंबित या पद से हटा दिया गया है। फिलहाल, कंपनी की आंतरिक सतर्कता टीम और कानूनी विशेषज्ञ शिकायतकर्ताओं के बयानों और फंडिंग के दावों की गहनता से पड़ताल कर रहे हैं ताकि इस पूरे नेक्सस का पर्दाफाश किया जा सके।