
कॉल सेंटर का भंडाफोड़ (Video Screenshot)
नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की एक BPO यूनिट इन दिनों गंभीर आरोपों और पुलिस जांच को लेकर सुर्खियों में है। करीब एक महीने चले एक अंडरकवर ऑपरेशन के बाद सामने आए तथ्यों ने न केवल कंपनी के आंतरिक सिस्टम पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि कार्यस्थल सुरक्षा, POSH और HR जवाबदेही पर भी बड़ी बहस छेड़ दी है। पुलिस जांच के बाद अब तक 9 FIR दर्ज की जा चुकी हैं और 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एक सीनियर HR अधिकारी भी शामिल है।
इस पूरे मामले की शुरुआत फरवरी में मिली एक शिकायत से हुई, जिसमें एक 20 साल की एक महिला कर्मचारी से जुड़े आरोप सामने आए थे। शिकायत के आधार पर नासिक पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू की। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने यूनिट के भीतर एक गोपनीय अंडरकवर ऑपरेशन चलाने का फैसला किया। इस दौरान महिला पुलिसकर्मियों सहित कांस्टेबलों को हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में तैनात किया गया। करीब दो से चार हफ्ते तक चले इस ऑपरेशन में पुलिसकर्मी कर्मचारियों की गतिविधियों, बातचीत और व्यवहार पर नजर रखते रहे और नियमित रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जाती रही।
पुलिस के अनुसार, इस निगरानी के दौरान कई संदिग्ध बातचीत और घटनाओं के संकेत मिले, जिसके आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया। बाद में इसे सुनियोजित और रणनीतिक ऑपरेशन बताया गया, जिसने शुरुआती शिकायतों को पुष्ट किया। मार्च में देवलाली पुलिस स्टेशन में पहली FIR दर्ज की गई, जिसमें एक कर्मचारी पर शादी का झूठा वादा कर यौन शोषण करने का आरोप लगाया गया। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ता गया और नए मामले सामने आने लगे।
समय के साथ 18 से 25 वर्ष की कई महिला कर्मचारियों ने सामने आकर शिकायतें दर्ज कराईं। इनमें यौन उत्पीड़न, अनुचित व्यवहार, मानसिक दबाव और धार्मिक प्रथाओं को प्रभावित करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। पुलिस के अनुसार 26 मार्च से 3 अप्रैल के बीच कुल 9 FIR दर्ज की गईं। सात मामलों में समान प्रकार के आरोप सामने आए। कई शिकायतें शुरुआत में दर्ज नहीं की गई थीं, लेकिन गिरफ्तारियों के बाद पीड़िताएं आगे आईं। इन FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत बलात्कार, यौन उत्पीड़न, पीछा करना, गरिमा को ठेस पहुंचाना और धार्मिक भावनाओं को आहत करने जैसे प्रावधान शामिल हैं।
इस मामले में अब तक छह पुरुष और एक महिला HR अधिकारी सहित कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस का आरोप है कि HR अधिकारी ने शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई नहीं की, जबकि वह POSH (यौन उत्पीड़न रोकथाम) प्रणाली का हिस्सा थीं। एक आरोपी अभी फरार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश तकनीकी और खुफिया इनपुट के आधार पर जारी है।
पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए ACP (क्राइम) के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। SIT अब यह जांच कर रही है कि क्या कंपनी ने POSH अधिनियम का पालन किया? क्या आंतरिक शिकायत समिति (ICC) ने उचित कार्रवाई की? क्या शिकायतों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया?
हालांकि मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में संगठित धर्मांतरण जैसे आरोप भी लगाए गए हैं, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अभी तक किसी बड़े षड्यंत्र या बाहरी फंडिंग के सबूत नहीं मिले हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जांच में पाया गया कि एक आरोपी व्यक्तिगत रूप से अधिक धार्मिक हो गया था और उसने सहकर्मियों को प्रभावित करना शुरू किया था, लेकिन यह किसी संगठित नेटवर्क का हिस्सा नहीं प्रतीत होता।
TCS ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है और जीरो टॉलरेंस नीति दोहराई है। टाटा संस के चेयरमैन ने इस घटना को गंभीर रूप से चिंताजनक बताया और कहा कि कंपनी की ओर से विस्तृत आंतरिक जांच जारी है। TCS ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है और निष्कर्षों के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अदालत में प्रस्तुत रिमांड रिपोर्ट के अनुसार वरिष्ठ प्रबंधन को कई शिकायतों के ईमेल भेजे गए थे, डिजिटल उपकरणों से 78 ईमेल और एक चैट बरामद हुई, कॉल डिटेल रिकॉर्ड में कई आरोपियों से संपर्क के प्रमाण मिले। पुलिस का आरोप है कि समय पर कार्रवाई न होने से स्थिति गंभीर होती गई।
Published on:
14 Apr 2026 12:17 pm
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