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Patrika Analysis: सिद्धारमैया के CM पद से इस्तीफे के बाद कर्नाटक में तीन खेमों के बीच कैसे संतुलन बिठाएंगे राहुल गांधी?

डीके शिवकुमार कर्नाटक के अगले सीएम बनने जा रहे हैं, लेकिन पावर शेयरिंग की लड़ाई अंदर खाने जारी है। आखिर राहुल गांधी कर्नाटक कांग्रेस के भीतर इन गुटों को कैसे संतुष्ट कर पाएंगे।

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Karnataka Power Politics

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ सिद्धारमैया (Photo-IANS)

Karnataka Congress Politics: सिद्धारमैया ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। राज्य में नए सिरे से सत्ता के समीकरण बिठाए जा रहे हैं। कांग्रेस के भीतर तीन खेमे हिस्साेदारी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। पहला खेमा डीके शिवकुमार गुट का है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि DKS भले ही राज्य के अगले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हों, लेकिन अन्य गुटों द्वारा कई डिप्टी सीएम बनाने की मांग से असहज हैं।

सिद्धारमैया ने अपने समर्थकों को संयम बरतने की अपील की

कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धारमैया को सीएम पद से इस्तीफा देने पर राज्यसभा का ऑफर दिया था। उन्होंने इसे मना करते हुए कहा कि उनकी केंद्रीय राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है। वह राज्य की राजनीति में सक्रिय रहना चाहते हैं। उन्होंने राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर अपना सुझाव कांग्रेस नेता व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सौंप दिया है।

सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया के कुछ समर्थकों ने उनसे अपने वफादार नेताओं को नई कैबिनेट में शामिल कराने की जोरदार पैरवी करने का आग्रह किया था। इस पर उन्होंने कहा कि वह विधायक दल की बैठक के बाद ही आलाकमान के समक्ष इस मुद्दे को उठाएंगे।

बेटे के लिए पसंद के विभाग की मांग की

कई मीडिया रिपोर्टों में यह बात सामने आई है कि सिद्धारमैया ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ मुलाकात के बाद अपने बेटे यतींद्र सिद्धारमैया के लिए पसंद के विभाग की मांग की है। सिद्धारमैया ने यतींद्र के लिए चिकित्सा शिक्षा और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग या उद्योग विभाग या फिर जल संसाधन विभाग की मांग रखी है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर भी खींचतान

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार सिद्धारमैया खेमा हाईकमान पर इस बात का दवाब बना रहा है कि राज्य में सत्ता पूरी तरह से डीके शिवकुमार को न सौंपी जाए। सिद्धारमैया गुट की चाहत यह भी है कि कांंग्रेस प्रदेश अध्यक्ष उनकी पसंद का हो। कांग्रेस हाईकमान यदि सिद्धारमैया गुट की इन मांगों मानती है कि राज्य ईकाई और सरकार में सत्ता के कई केंद्र स्थापित हो सकते हैं। सिद्धारमैया गुट के डिप्टी सीएम वाली मांग पर डीके शिवकुमार राजी नहीं है।

इधर, वरिष्ठ नेता और मंत्री सतीश जारकीहोली ने मंत्री पद बरकरार रखते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने की इच्छा जताई है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को बताया कि अतीत में एस.एम. कृष्णा, मल्लिकार्जुन खरगे और डी.के. शिवकुमार जैसे नेता एक साथ मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष दोनों पद संभाल चुके हैं, लेकिन कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने उन्हें बता दिया है कि पार्टी एक पद एक व्यक्ति के फॉर्मूले पर चलेगी।

मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक भी डिप्टी सीएम के रेस में

कर्नाटक कांग्रेस में एक धड़ा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का भी है। खरगे के बेटे प्रियांक खरगे सिद्धारमैया की सरकार में मंत्री थे। उनका नाम भी डिप्टी सीएम की रेस में शामिल है। सरकार में हिस्सेदारी को लेकर यह धरा भी लामबंदी में जुटा है। दरअसल, इसके पीछे कर्नाटक की जातीय गुना-गणित है।

डीके शिवकुमार वोक्कालिग्गा समुदाय से आते हैं। जबकि, बीते कुछ समय में कांग्रेस दलितों को साधने की तैयारी में है। सिद्धारमैया को हटाने के बाद कांग्रेस को अहिंदा समुदाय के छिटकने का डर है। ऐसे में हाईकमान किसी दलित नेता को डिप्टी सीएम बनाने पर विचार कर रही है। प्रियांक का नाम टॉप पर है। क्योंकि, मल्लिकार्जुन खरगे दलित समुदाय से आते हैं। केंद्रीय राजनीति में आने से पहले वह कर्नाटक की सियासत में कांग्रेस का बड़ा चेहरा थे। वह राज्य में नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं।