- नामित चार सांसद रिटायर -कुल 19 सीटें हुई खाली
नई दिल्ली. संसद के बजट सत्र से ठीक पहले भाजपा को बड़ा झटका लगा है। लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में भी भाजपा पूर्ण बहुमत से दूर हो गई है। राज्यसभा में एनडीए के पास भी बहुमत नहीं है, जिसके चलते सत्र के दौरान अहम विधेयक पारित करवाने के लिए सरकार को अन्य दलों के भरोसे रहना होगा।
दरअसल, राज्यसभा में वर्तमान में 226 सदस्य है। ऐसे में बहुमत के लिए 113 सदस्यों की संख्या आवश्यक है। केंद्र सरकार की ओर से नामित चार सांसदों का कार्यकाल पिछले सप्ताह खत्म हो गया। इसके चलते राज्यसभा में भाजपा सांसदों की संख्या 86 रह गई है। वहीं एनडीए में शामिल दलों के अलावा निर्दलीय व 7 नामति सदस्यों के साथ एनडीए के पास फिलहाल 109 सदस्य है। ऐसे में एनडीए बहुमत से पीछे आ गया है।
ओडिशा में विधानसभा चुनाव हारने के बाद बीजेडी ने साफ कर दिया है कि संसद में अब वे भाजपा का साथ नहीं देगी। विपक्ष की भूमिका निभाने के चलते राज्यसभा में उसके 9 सदस्य सरकार के खिलाफ वोट करते दिख सकते हैं। ऐसे में भाजपा की उम्मीद वायएसआर कांग्रेस के 11 सदस्यों से हैं। लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव में वायएसआर कांग्रेस भाजपा का साथ दे चुकी है।
कांग्रेस के पास 26 सदस्य है। यह राज्यसभा के लिए रेड जोन के नजदीक वाली संख्या है। दरअसल, राज्यसभा में कुल सदस्यों की संख्या 245 है। नेता प्रतिपक्ष हासिल करने के लिए किसी भी विपक्षी दल के पास राज्यसभा की कुल संख्या का दस फीसदी यानी 25 सदस्य होने जरूरी है।
राज्यसभा में फिलहाल 19 सीटें खाली हैं। इनमें जम्मू-कश्मीर के 4 और नामित सदस्यों की 4 सीटें हैं। इसके अलावा असम, बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान और त्रिपुरा में राज्यसभा सांसदों के लोकसभा चुनाव जीतने के चलते 11 सीटें खाली हुई है। इन 11 सीटों के उपचुनाव में करीब 10 सीटों पर एनडीए की जीत तय मानी जा रही है। इसके बाद एनडीए बहुमत हासिल कर लेगा।