आती रहेंगी बहारें : जापान में धीरे-धीरे मुरझा रहे पेड़ों को बचाने के लिए तकनीक का सहारा
टोक्यो. जापान में हर साल वसंत की शुरुआत के साथ चेरी के गुलाबी और सफेद फूलों की बहार आ जाती है। उम्र बढऩे के कारण चेरी के पेड़ धीरे-धीरे मुरझा रहे हैं। इन्हें बचाने के लिए अब एआइ तकनीक की मदद ली जा रही है। जापान की एक कंपनी ने ऐसा एआइ टूल बनाया है, जो सिर्फ फोटो देखकर बता देता है कि पेड़ कितना स्वस्थ है। कंपनी का दावा है कि यह तकनीक इन पेड़ों को बचाने में बहुत मदद कर सकती है।जापान में चेरी के कई पेड़ों की उम्र 70 से 80 साल के आसपास पहुंच चुकी है। इस उम्र में उनकी देखभाल करना और स्वस्थ बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। जापानी कंपनी ने जो एआइ टूल विकसित किया है, वह पेड़ का फोटो देखकर एक से पांच तक की रेटिंग देता है। पहली रेटिंग का मतलब ‘बहुत स्वस्थ’, जबकि पांचवीं का मतलब ‘चिंता की बात’ है। टूल को 5,000 तस्वीरों से ट्रेन किया गया, जो विशेषज्ञों की मदद से इक_ा की गई थीं। अब तक करीब 20,000 नई तस्वीरें और मिल चुकी हैं। सारा डेटा प्रशासन को मुफ्त दिया जा रहा है, ताकि पेड़ों की देखभाल बेहतर ढंग से की जा सके। जलवायु परिवर्तन, ज्यादा गर्मी और बारिश की कमी के कारण भी पेड़ों की हालत बिगड़ रही है।
एक नए पेड़ की लागत 5.5 लाख रुपए
चेरी का एक नया पेड़ लगाने में 10 लाख येन (करीब 5.5 लाख रुपए) खर्च होता है। इसलिए पुराने पेड़ों को बचाना और उनकी देखभाल करना बहुत जरूरी हो गया है। जापान ट्री डॉक्टर्स एसोसिएशन के हिरोयुकी वाडा टोक्यो के कई इलाकों में पेड़ों की जांच करते हैं। उनका कहना है कि एआइ टूल यह समझने में भी वैज्ञानिकों की मदद करेगा कि पेड़ खराब क्यों हो रहे हैं।
जिंदगी की नश्वरता का प्रतीक भी
चेरी खिलने को जापानी संस्कृति में जिंदगी की नश्वरता (यानी कुछ भी हमेशा नहीं रहता) का प्रतीक माना जाता है, क्योंकि इसके फूल बहुत जल्दी झड़ जाते हैं। इन फूलों का खिलना जापान में नए बिजनेस साल और नई नौकरियों की शुरुआत का भी संकेत देता है। जापान में हर साल ‘सकुरा’ (चेरी खिलने का मौसम) उत्साह से मनाया जाता है। यह वसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है।