- बाड़मेर के सांवलाराम व सीकर के शिशुपाल कोंगो में हुए थे शहीद
नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस के अवसर पर वीरता के लिए राष्ट्रपति का पदक दो शहीदों को मरणोपरांत प्रदान किया जाएगा।
राजस्थान के मूल निवासी और सीमा सुरक्षा बल के हैड कांस्टेबल सांवलाराम विश्नोई व शिशुपाल सिंह बगड़िया को 75वें गणतंत्र दिवस पर वीरता के दुर्लभ विशिष्ट कृत्य के लिए वीरता का यह सर्वोच्च पदक प्रदान करने की घोषणा की गई। राजस्थान की माटी के इन दोनों सपूतों ने संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के दस्ते में तैनाती के दौरान कोंगो में विद्रोहियों से मुकाबला करते हुए 26 जुलाई 2022 को प्राणोत्सर्ग किया था। इसके लिए इन दोनों को संयुक्त राष्ट्र ने भी प्रतिष्ठित वीरता पदक डैग हैमरस्कजॉल्ड मेडल से सम्मानित किया था।
विद्रोहियों को नहीं घुसने दिया कैम्प में
बीएसएफ की 65वीं बटालियन में तैनात सांवलाराम विश्नोई व 97वीं बटालियन में तैनात शिशुपाल सिंह बीएसएफ के 15 यूएन मिशन दस्ते में शामिल थे। कोंगो के बुटेम्बो शहर में विद्रोहियों के हिसंक प्रदर्शन की सूचना पर दस्ते को मोरोक्को रेपिड डेपलॉयमेंट बटालियन के कैम्प में तैनात किया गया। विद्रोहियों ने कैम्प में घुसने की कोशिश करते हुए दस्ते पर स्वचालित हथियारों से गोलियां चलाई। सांवलाराम व शिशुपाल बुरी तरह घायल हो गए, फिर भी उन्होंने मुख्य सुरक्षा स्थल पर मोर्चा सम्भाला। अदम्य साहस के साथ विद्रोहियों की हिंसक भीड़ के इरादे नाकाम करते हुए प्राणोत्सर्ग कर दिया।
इस बार 1132 को वीरता पदक
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार को पुलिस, अग्निशमन सेवा, होम गार्ड व नागरिक सुरक्षा और सुधार सेवा के 1132 कार्मिकों को इस वर्ष के वीरता पदक प्रदान करने की घोषणा की। इनमें दो राष्ट्रपति के वीरता पदक व 275 वीरता पदक शामिल हैं। वीरता पदकों में 119 नक्सल प्रभावित इलाकों, 133 जम्मू-कश्मीर तथा 25 अन्य क्षेत्रों में तैनात कार्मिकों को प्रदान किए जाएंगे। वीरता पदक हासिल करने वालों में 72 जम्मू-कश्मीर पुलिस, 65 सीआरपीएफ, 21 एसएसबी, 18 महाराष्ट्र, 26 छत्तीसगढ़, 15 झारखंड, 8 दिल्ली व बाकी अन्य राज्यों के हैं। इसके अलावा विशिष्ट सेवाओं के लिए 102 को राष्ट्रपति पदक और 753 को सराहनीय सेवाओं के लिए पदक प्रदान किए जाएंगे।