
राहुल गांधी (फोटो- एएनआई)
देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह नए सिरे से तैयार करने की जरूरत है ताकि छात्रों को तनाव नहीं बल्कि सुरक्षा मिले और अभिभावकों की मेहनत का परिणाम आंसुओं में नहीं, सफलता में दिखाई दे। उन्होंने कहा कि पेपर लीक ने अनेक परिवारों को गहरा दर्द दिया है और इस समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए रिया नाम की छात्रा के पिता राजेश से हुई मुलाकात का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि बेटी को खोने के बाद राजेश पूरी तरह टूट चुके हैं और उनका दर्द देखकर हर किसी की आंखें नम हो जाती हैं। राहुल गांधी ने कहा कि यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि ऐसे अनेक परिवार हैं जिन्होंने पेपर लीक के कारण अपने बच्चों का भविष्य और खुशियां खो दी हैं। उन्होंने लिखा, हर नाम के पीछे एक मां और एक पिता हैं, जिनके लिए अब कोई कल नहीं बचा। इस व्यवस्था को शुरुआत से फिर बनाना होगा, जहां बच्चों को तनाव नहीं बल्कि सुरक्षा मिले और माता-पिता को उनके त्याग का फल आंसू नहीं, सफलता के रूप में मिले।
राहुल गांधी की यह टिप्पणी शुक्रवार को उत्तराखंड के देहरादून में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान रिया के पिता से हुई मुलाकात के बाद आई। इस कार्यक्रम में राजेश ने बताया कि उनकी बेटी 3 मई को परीक्षा देकर बेहद खुश लौटी थी। बाद में जब पेपर लीक की खबर सामने आई तो उसने अपने मोबाइल पर यह समाचार दिखाया और कहा कि प्रश्नपत्र वास्तव में लीक हुआ है। उन्होंने राहुल गांधी से संसद में यह मुद्दा उठाने की अपील करते हुए कहा कि जो उनकी बेटी के साथ हुआ, वह किसी अन्य परिवार के साथ नहीं होना चाहिए।
देहरादून के कार्यक्रम में राहुल गांधी ने सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दस वर्षों में करीब 7.5 करोड युवाओं को पेपर लीक की घटनाओं का नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर प्रश्नपत्र इंटरनेट, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे प्लेटफॉर्म पर बड़ी रकम लेकर उपलब्ध कराए जाते हैं। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले दशक में 152 पेपर लीक की घटनाएं हुईं, लेकिन किसी भी मामले में दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यह केवल परीक्षा का नहीं बल्कि देश के युवाओं के भविष्य और उनकी मेहनत से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
Updated on:
18 Jul 2026 01:47 pm
Published on:
18 Jul 2026 01:26 pm
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