नई दिल्ली

पाकिस्तान की क्रिप्टो पहल में ट्रंप परिवार की भागीदारी पर उठे सवाल

पर्दे के पीछेः अंतरराष्ट्रीय राजनीति और व्यापारिक हितों का टकराव

1 minute read
May 30, 2025
trump

नई दिल्ली. अमरीकी के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और उनके परिवार के स्वामित्व वाली क्रिप्टोकरेंसी कंपनी वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल इंक (डब्ल्यूएलएफआइ) और पाकिस्तान सरकार के बीच हुए समझौते ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और नैतिक बहस को जन्म दिया है। डब्ल्यूएलएफआइ में ट्रंप परिवार की 60 फीसदी हिस्सेदारी है। इस समझौते के कुछ ही सप्ताह बाद ही राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम की मध्यस्थता का दावा किया था। यह कदम पाकिस्तान की वैश्विक छवि को सुधारने और उसे नई वित्तीय व्यवस्था में शामिल करने की दिशा में एक रणनीतिक प्रयास माना जा रहा है।डब्ल्यूएलएफआइ ने अप्रैल 2025 में पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल (पीसीसी) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस काउंसिल की स्थापना मार्च 2025 में प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ द्वारा की गई थी और इसके पहले सीईओ के रूप में बिलाल बिन साकिब को नियुक्त किया गया। बिलाल ने लास वेगास में आयोजित एक क्रिप्टो सम्मेलन में पाकिस्तान की छवि को सुधारने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा, 'पाकिस्तान और बिटकॉइन दोनों ही खराब प्रचार के शिकार रहे हैं।'डब्ल्यूएलएफआइ ने डॉनल्ड ट्रंप को 'चीफ क्रिप्टो एडवोकेट' और उनके बेटों डॉनल्ड जूनियर, एरिक ट्रंप और पोते बैरन ट्रंप को 'वेब3 एंबेसडर' के रूप में नामित किया है। हालांकि, अमरीकी सीनेट की एक उपसमिति ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ हुई बातचीत का ब्योरा मांगा है। इस पर डब्ल्यूएलएफआइ कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।हालांकि, पाकिस्तान में क्रिप्टोकरेंसी पर कानूनी प्रतिबंध हैं और स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान और वित्त मंत्रालय ने इसे अवैध घोषित किया है। ऐसे में डब्ल्यूएलएफआइ और पीससी के बीच हुआ समझौता और ट्रंप परिवार की इसमें भागीदारी कई सवाल खड़े करती है। यह घटनाक्रम न केवल पाकिस्तान की डिजिटल अर्थव्यवस्था की दिशा में एक नए अध्याय की शुरुआत है बल्कि, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और व्यापारिक हितों के बीच बढ़ती जटिलताओं का भी संकेत देता है।

Published on:
30 May 2025 11:13 pm
Also Read
View All

अगली खबर