
Jharkhand Politics: झारखंड के मंत्री इरफान अंसारी के बयान पर अब केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने तंज कसा है। उन्होंने अंसारी के बयान को देश विरोधी और संविधान के खिलाफ बताते हुए इसकी निंदा की। आठवले ने कहा कि भारत में कई बड़े आंदोलन हुए, लेकिन देश कभी बांग्लादेश, नेपाल या श्रीलंका जैसे हालात में नहीं पहुंचा। उन्होंने सवाल उठाया कि लोकतंत्र में विरोध के नाम पर संविधान को चुनौती देना कहां तक सही है?
दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान रामदास आठवले ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह मामला लोगों के अधिकार छीने जाने से जुड़ा है। संविधान और उससे मिले अधिकार देश के लिए बेहद अहम हैं। बाबा साहेब आंबेडकर ने संविधान बनाने के लिए कड़ी मेहनत की थी। ऐसे में उनके बनाए संविधान को चुनौती देने वाले बयानों का विरोध होना चाहिए।
आठवले ने अपनी बात समझाने के लिए देश में हुए कई बड़े आंदोलनों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि भारत में खालिस्तान आंदोलन हुआ, किसानों ने आंदोलन किया और महाराष्ट्र में मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी का नाम बाबा साहेब आंबेडकर के नाम पर रखने के लिए 17 साल तक संघर्ष चला।
इन आंदोलनों के दौरान भी देश की व्यवस्था नहीं बदली और भारत बांग्लादेश, नेपाल या श्रीलंका जैसे हालात में नहीं पहुंचा। आठवले का कहना था कि लोकतंत्र में लोगों को अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि देश के संविधान को ही निशाना बनाया जाए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर ने जिस संविधान को बनाने में अपना पूरा जीवन और मेहनत लगाई, उसका सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने इरफान अंसारी के बयान को संविधान को चुनौती देने की कोशिश बताया और साफ कहा कि वह ऐसे बयानों का विरोध करते हैं।
दरअसल, इरफान अंसारी के बयान को लेकर पहले से राजनीतिक विवाद चल रहा है। अब रामदास आठवले की इस प्रतिक्रिया ने बहस को और तेज कर दिया है। आठवले ने अपने बयान में एक तरफ लोकतांत्रिक आंदोलनों के अधिकार को स्वीकार किया, तो दूसरी तरफ संविधान के खिलाफ जाने वाली बातों पर कड़ा एतराज जताया है। उनकी प्रतिक्रिया के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और बढ़ने के आसार हैं।