
Sanjay Raut PM Modi target: संसद के दोनों सदनों से एंटी पेपर लीक बिल पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोशल मीडिया (इंस्टाग्राम) पर साझा किए गए वीडियो को लेकर सियासी संग्राम छिड़ गया है। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि देश में परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक कराने वाले असली सरगना खुद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी संगठनों में मौजूद हैं।
बता दें कि पीएम मोदी के सोशल मीडिया संदेश पर पलटवार करते हुए संजय राउत ने कहा कि जब से केंद्र में आपकी सरकार आई है, तब से देश भर में लगातार पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं। महाराष्ट्र में हाल ही में जो गिरफ्तारियां हुई हैं, उनके तार सीधे तौर पर सत्ताधारी दल से जुड़े हैं। उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक पेपर माफिया से जुड़े लोग बीजेपी के शीर्ष नेताओं के साथ मंच साझा करते हुए देखे जाते हैं।
इतना ही नहीं राउत ने आगे दावा किया कि महाराष्ट्र में बहुसंख्यक कोचिंग संस्थानों के संचालक बीजेपी समर्थक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े लोग शामिल रहते हैं, जिससे समय से पहले पेपर बाहर आ जाता है।
संसद में हाल ही में प्रस्तुत 'वंदे मातरम' विधेयक पर हुई चर्चा का हवाला देते हुए शिवसेना (UBT) सांसद ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश के इतने संवेदनशील और ऐतिहासिक विधेयक पर बहस के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दोनों ही सदन में उपस्थित नहीं थे। प्रधानमंत्री चुनावी जनसभाओं में वंदे मातरम पर भाषण देते हैं और विपक्ष पर निशाना साधते हैं, लेकिन जब संसद में इस पर गंभीर चर्चा हो रही होती है, तो शीर्ष नेतृत्व गायब रहता है। यह देशभक्ति का कैसा ढोंग है?
बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर की गई टिप्पणियों का जवाब देते हुए संजय राउत ने राहुल गांधी का बचाव किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी एक उच्च शिक्षित, संस्कारी और अध्ययनशील जननेता हैं। वे हमेशा मर्यादा में रहकर और सोच-समझकर बात करते हैं। यह उनके परिवार की वैचारिक और सांस्कृतिक विरासत है। पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का पूरा इतिहास देश जानता है। सत्ता पक्ष के नेताओं को शब्दों की समझ नहीं है, इसलिए आरएसएस को अपने नेताओं के लिए विशेष बौद्धिक शिविर आयोजित करना चाहिए।