
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के वोटर मैपिंग पर सवाल (Photo: IANS)
Delhi SIR: दिल्ली मतदाता सूची के ड्राफ्ट विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व सांसद साकेत गोखले ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के वोटर लिस्ट मैपिंग पर सवाल उठाते हुए निर्वाचन आयोग (ECI) से जवाब मांगा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता साकेत गोखले ने चुनाव आयोग से पूछा है कि दिल्ली की ड्राफ्ट SIR मतदाता सूची में ज्ञानेश कुमार की मौजूदा प्रविष्टि को पिछली SIR मतदाता सूचियों से किस आधार पर जोड़ा (मैप) गया है।
साकेत गोखले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिए दावा किया कि दिल्ली की ड्राफ्ट एसआईआर मतदाता सूची में ज्ञानेश कुमार का नाम ज्ञानेश कुमार, पिता- सुबोध कुमार के रूप में दर्ज है। टीएमसी नेता के अनुसार, उन्होंने इस नाम और पिता के नाम से मेल खाती प्रविष्टि की तलाश दिल्ली, उत्तर प्रदेश और केरल इन तीनों राज्यों की पिछली SIR सूचियों (2002/2003) में की, लेकिन किसी भी राज्य में इससे मेल खाता हुआ रिकॉर्ड नहीं मिला।
साकेत गोखले ने SIR प्रक्रिया के तहत पुराने मतदाता रिकॉर्ड से मौजूदा मतदाता की जानकारी के मिलान को लेकर सवाल उठाया है। उनके मुताबिक, यदि किसी मतदाता की जानकारी पिछली SIR सूची से नहीं जुड़ती है, तो उसे 'नो मैपिंग' श्रेणी में रखा जा सकता है। वहीं, रिकॉर्ड में कुछ असंगतियां मिलने पर मामला 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' के तौर पर चिह्नित किया जा सकता है।
दिल्ली SIR के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं को इन दोनों श्रेणियों में नोटिस जारी किए गए हैं। 18 सितंबर को प्रकाशित सूची में करीब 33.1 लाख मतदाताओं के नाम 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' या पिछली SIR सूची से 'नो मैपिंग' के आधार पर चिह्नित किए गए थे।
गोखले का सवाल है कि अगर ज्ञानेश कुमार की मौजूदा प्रविष्टि को पिछली SIR सूची से नहीं जोड़ा गया है, तो उनके रिकॉर्ड को किस आधार पर मौजूदा मतदाता सूची में शामिल किया गया और क्या उन्हें भी किसी तरह का नोटिस जारी किया गया।
साकेत गोखले ने चुनाव आयोग से मुख्य रूप से चार सवालों का जवाब मांगा है। उन्होंने पूछा कि ज्ञानेश कुमार को पिछली SIR की किस राज्य की मतदाता सूची से मैप किया गया है और क्या वह 2002/2003 में पंजीकृत मतदाता थे।
इसके अलावा उन्होंने पूछा कि अगर केरल, दिल्ली या उत्तर प्रदेश की पिछली SIR सूचियों में उनके नाम और पिता के नाम से कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता, तो मौजूदा मतदाता सूची में उनका नाम किस आधार पर दर्ज है। गोखले ने यह भी पूछा कि क्या उन्हें 'नो मैपिंग' या 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' के आधार पर कोई नोटिस दिया गया है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब दिल्ली SIR में लालकृष्ण आडवाणी सहित कई प्रमुख नेताओं, अधिकारियों और बड़ी हस्तियों के नाम 'नो मैपिंग' या 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' के तहत चिह्नित किए गए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, किसी मतदाता को नोटिस मिलना अपने आप में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का अर्थ नहीं है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि किसी नाम को हटाने से पहले संबंधित मतदाता को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा।
बता दें कि उत्तर प्रदेश में जन्मे ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल कैडर के आईएएस (IAS) अधिकारी रहे हैं। उन्होंने केरल, केंद्र सरकार और दिल्ली में विभिन्न जिम्मेदारियां संभाली हैं। फरवरी 2025 में उन्होंने भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था।
फिलहाल, साकेत गोखले द्वारा उठाए गए सवालों पर चुनाव आयोग की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण का इंतजार है, पूरा मामला उसके बाद ही स्पष्ट होगा।
Updated on:
21 Sept 2026 04:31 pm
Published on:
21 Sept 2026 04:31 pm
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