नई दिल्ली

सत्या निकेतन हादसे के बाद सामने आई सच्चाई, ‘हॉस्टल डेज’ के दूसरे PG में भी मंडरा रहा मौत का खतरा, कमरों में बंद रहने को मजबूर छात्र

Delhi Building Collapse: सत्या निकेतन हादसे के बाद 'हॉस्टल डेज' के अन्य PG में सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई है। संकरी सीढ़ियां, बंद दरवाजे और वेंटिलेशन की कमी मासूम छात्रों की जान जोखिम में डाल रही है। पढ़ें पूरी खबर...
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Sudhanshu PG operator arrested
पुलिस ने पीजी संचालक को किया गिरफ्तार (Photo-IANS)

Delhi Building Collapse:दिल्ली के सत्या निकेतन इलाके में हाल ही में हुए दर्दनाक हादसे में सात लोगों की जान चली गई थी। जिस 'हॉस्टल डेज' नाम की कंपनी के पास उस गिरी हुई इमारत की जिम्मेदारी थी, उसके बाकी पीजी (PG) हॉस्टलों का हाल भी बहुत खराब निकला है। ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया है कि दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में चल रहे इन पीजी में न तो आग से बचने के कोई इंतजाम हैं और न ही किसी मुसीबत के वक्त बाहर भागने के लिए सुरक्षित रास्ते। हादसे के बाद से ही संचालक अपनी लापरवाही छिपाने के लिए बोर्ड और होर्डिंग्स हटाने में जुटे हैं, जबकि खौफ के साए में जीने को मजबूर छात्र अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

जानलेवा बना पीजी का माहौल

मोती बाग और आसपास के इलाकों में बने इन पीजी हॉस्टलों की हालत बेहद खराब है। 5-5 मंजिला इन इमारतों में 30 से 40 छात्रों को छोटे-छोटे कमरों में रखा गया है। इमारतों के अंदर जाने वाली सीढ़ियों की चौड़ाई बहुत कम है, जिससे किसी आपात स्थिति में भगदड़ मचने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा, बाहर निकलने के मुख्य रास्ते पर दुकानें और गाड़ियाँ खड़ी रहने से रास्ता हमेशा बंद रहता है। ज्यादातर कमरों में एक भी खिड़की नहीं है, जिससे ताजी हवा अंदर आ सके। आग लगने की स्थिति में यहां धुएं से दम घुटने का सबसे ज्यादा खतरा है। छात्रों ने यह भी बताया कि सुरक्षा के नाम पर मकान मालिक रोज रात को पूरी इमारत पर बाहर से ताला लगा देते हैं, जिससे रात में बाहर निकलना भी नामुमकिन हो जाता है।

'सुधुंशु जेल में, वार्डन फरार… हमें लग रहा है डर'

सत्या निकेतन हादसे के बाद कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 'हॉस्टल डेज' के संचालक सुधांशु लवनीश को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि उसका साथी शुभम त्यागी अभी फरार है। इस पूरी स्थिति के बीच सबसे ज्यादा परेशानी यहां रह रहे छात्रों को उठानी पड़ रही है।दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले एक छात्र ने बताया कि वे बिना खिड़की वाले एक छोटे से कमरे के लिए हर महीने ₹34,000 किराया देते हैं। हादसे के बाद से ही वार्डन गायब है, मालिक हिरासत में है और कोई भी उनकी कॉल का जवाब नहीं दे रहा है। रात में इमारत को बाहर से ताला लगा दिए जाने के कारण छात्र खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

कार्रवाई के डर से हटाए जा रहे साइन बोर्ड और पर्दे

मामला सामने आने के बाद से ही संचालकों द्वारा कानूनी कार्रवाई से बचने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। कई संपत्तियों से 'हॉस्टल डेज' के बड़े पीले बोर्ड रातों-रात हटा दिए गए हैं। कुछ जगहों पर काले और भूरे रंग के पर्दे टांगकर ब्रांड के लोगो को छिपाने की कोशिश की गई है। इसके साथ ही कई छात्रों को बिना कोई समय दिए तुरंत कमरे खाली करके चले जाने को कह दिया गया है।

दिल्ली की पुरानी हादसों से भी नहीं ली कोई सीख

दिल्ली में सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले हौज रानी, सैदुलाजाब और विवेक विहार में हुए भीषण हादसों की जांच रिपोर्ट में भी यही तथ्य सामने आए थे। जांच रिपोर्टों के अनुसार, अधिकांश मौतें वेंटिलेशन की कमी और धुएं के कारण दम घुटने से होती हैं। नगर निगम और संबंधित एजेंसियों की सुस्ती के चलते नियमों के विपरीत निर्माण कार्य जारी रहते हैं। नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार हॉस्टल के रास्तों की चौड़ाई कम से कम 1.25 मीटर होनी चाहिए, लेकिन यहां अधिकांश जगहों पर यह एक मीटर से भी कम पाई गई है।

सख्त नियम और अलग एजेंसी बनाने की उठ रही मांग

शहरी विकास विशेषज्ञों और पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, मुख्य समस्या नियमों के अभाव की नहीं बल्कि उन्हें सख्ती से लागू न करा पाने की है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक जवाबदेही तय नहीं की जाएगी और रियल एस्टेट नियमों (RERA) की तर्ज पर एक स्वतंत्र 'बिल्डिंग रेगुलेटरी अथॉरिटी' का गठन नहीं होगा, तब तक इस प्रकार के अवैध संचालन और सुरक्षा में लापरवाही पर पूरी तरह रोक लगा पाना मुश्किल होगा।

Updated on:
10 Sept 2026 09:51 am
Published on:
10 Sept 2026 09:48 am