
Red Fort Blast 2025: लाल किला ब्लास्ट की पूरी पहेली सुलझी! NIA की जांच में बड़ा खुलासा (फोटो सोर्स: ANI)
NIA Red Fort Terror Attack: लाल किला के पास हुए भीषण धमाके की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने ऐसा दावा किया है, जिसने हमले की पूरी तस्वीर को और गंभीर बना दिया है। एजेंसी की चार्जशीट के मुताबिक, कार में मौजूद विस्फोटक को अचानक हुए हादसे के कारण नहीं, बल्कि एक सुनियोजित तंत्र के जरिए सक्रिय किया गया था। जांच में सामने आए साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि हमलावरों ने लाल किले को महज घटनास्थल नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक निशाने के तौर पर चुना था।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, NIA ने इस मामले में मई 2026 में 10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिस पर दिल्ली की एक अदालत ने 29 अगस्त को संज्ञान लिया। एजेंसी ने जांच के दौरान फोरेंसिक और डीएनए साक्ष्यों के आधार पर विस्फोट की परिस्थितियों को जोड़ने की कोशिश की है।
चार्जशीट में बताया गया है कि घटनास्थल से बरामद एक जूते में धातु का हिस्सा मिला था। NIA का दावा है कि यह हिस्सा उस तंत्र से जुड़ा था, जिसके जरिए कार में रखे विस्फोटक को सक्रिय किया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस बरामदगी और अन्य फोरेंसिक साक्ष्यों से यह निष्कर्ष निकला कि विस्फोट को जानबूझकर अंजाम दिया गया।
जांच में मृत हमलावर डॉ. उमर उन नबी के शरीर से जुड़े नमूने में TATP और अमोनियम नाइट्रेट के अंश मिलने की बात कही गई है। NIA के मुताबिक, इससे यह स्थापित करने में मदद मिली कि विस्फोट के वक्त नबी कार के भीतर मौजूद था।
एजेंसी ने आरोप लगाया है कि विस्फोटक उपकरण तैयार करने में जसिर बिलाल वानी की भूमिका थी। चार्जशीट के अनुसार, वानी को विस्फोटक तैयार करने की तकनीकी जानकारी थी और उसने नबी को उपकरण से संबंधित हिस्सा उपलब्ध कराया था।
जांच एजेंसी ने नबी की गतिविधियों का विश्लेषण करते हुए दावा किया कि उसने दिसंबर 2023 से मई 2025 के बीच लाल किले और उसके आसपास के इलाके के कई दौरे किए। कुछ मौकों पर वह अन्य आरोपियों के साथ भी वहां पहुंचा था।
NIA का कहना है कि आरोपियों की नजर में लाल किला भारतीय राज्य का महत्वपूर्ण प्रतीक था। एजेंसी को कथित तौर पर नबी के ठिकाने से ऐसे दस्तावेज भी मिले, जिनमें लोकतांत्रिक व्यवस्था के विरोध और भारत में शरिया कानून लागू करने जैसी विचारधारा का उल्लेख था।
चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि समूह नए सदस्यों की तलाश कर रहा था। नबी और उसके सहयोगियों पर छात्रों तथा डॉक्टरों समेत संभावित युवाओं को कट्टरपंथी विचारों की ओर आकर्षित करने का आरोप है।
NIA के अनुसार, कुछ लोगों को भविष्य में आत्मघाती हमले के लिए तैयार करने की कोशिश भी की गई। जांच में टेलीग्राम चैट और डिजिटल उपकरणों से जुड़ी गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है।
एजेंसी ने डॉ. शहीद सईद पर समूह को आर्थिक मदद पहुंचाने का आरोप लगाया है। चार्जशीट के मुताबिक, करीब 16 लाख रुपये नकद कथित तौर पर संगठन की गतिविधियों के लिए दिए गए। जांच एजेंसी का दावा है कि इस धन का इस्तेमाल हथियारों और विस्फोटक तैयार करने के लिए जरूरी सामान जुटाने में किया गया।
NIA ने इस पूरे नेटवर्क को Ansar Ghazwat-ul-Hind (AGuH) के पुनर्गठन की कोशिश से जोड़ा है। AGuH की स्थापना 2017 में जाकिर राशिद भट उर्फ जाकिर मूसा ने की थी। मूसा की 2019 में मौत के बाद संगठन की गतिविधियां कमजोर पड़ गई थीं। एजेंसी का आरोप है कि आरोपियों ने इसके एक नए अंतरिम ढांचे को खड़ा करने की कोशिश की।
जांच के दौरान कथित प्रशिक्षण सामग्री और डिजिटल दस्तावेज भी बरामद होने का दावा किया गया है। NIA के अनुसार, इनमें हथियारों, गुप्त गतिविधियों और हिंसक अभियानों से संबंधित सामग्री शामिल थी।
Updated on:
10 Sept 2026 07:43 am
Published on:
10 Sept 2026 07:19 am
