
लाल किला ब्लास्ट मामले में NIA की चार्जशीट से हुआ बड़ा खुलासा (फाइल फोटो)
Red Fort Terror Attack: दिल्ली के लाल किला इलाके में हुए बम धमाके को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कोर्ट में दाखिल अपनी चार्जशीट में की चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच में सामने आया है कि यह कोई दुर्घटनावश हुआ विस्फोट नहीं था, बल्कि हमलावर डॉक्टर उमर उन नबी ने जानबूझकर अपने जूते में फिट किए गए एक पीजोइलेक्ट्रिक प्लेट के जरिए IED को ट्रिगर किया था। अल-कायदा से जुड़े संगठन 'अंसार गजवत-उल-हिंद' से ताल्लुक रखने वाले डॉक्टर और उसके साथियों के द्वारा किए गए इस हमले में 12 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 29 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
NIA द्वारा अदालत में पेश की गई चार्जशीट के अनुसार, धमाके में इस्तेमाल कार में रखा विस्फोटक पूरी तरह से नबी के नियंत्रण में था। जांच टीमों को मौके से हमलावर उमर का एक जूता मिला। इस जूते की एड़ी में लोहे का एक खास टुकड़ा और एक स्पेशल प्लेट लगी थी।
यह दरअसल ट्रांसड्यूसर तकनीक पर आधारित एक पीजोइलेक्ट्रिक प्लेट (Piezoelectric Plate) थी, जिसे गिरोह के विस्फोटक विशेषज्ञ जसीर बिलाल वानी ने तैयार किया था। यह प्लेट ऐसी तकनीक पर काम करती थी कि जैसे ही जूते से नीचे दबाव पड़ता, उसमें से बिजली की चिंगारी बनती थी। उसी चिंगारी से कार में रखा बारूद तुरंत फट गया। यानी हमलावर ने खुद अपने पैर के दबाव से बम का ट्रिगर दबाया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, आतंकी उमर उन नबी लाल किला इलाके को बहुत अच्छी तरह से जानता था। वह दिसंबर 2023 से मई 2025 के दौरान कम से कम 12 बार इस इलाके की रेकी कर चुका था। उसने बम बनाने का सामान भी इसी इलाके की दुकानों से खरीदा था।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी में नबी के ठिकाने से मिले कागजातों से पता चला है कि यह समूह भारतीय लोकतंत्र और राज्य व्यवस्था के सख्त खिलाफ था। वे लाल किले को देश की शान मानते थे, इसीलिए उन्होंने जानबूझकर इस जगह को चुना ताकि पूरे देश में दहशत फैलाई जा सके।
NIA के खुलासे से यह भी सामने आया है कि यह गिरोह पढ़े-लिखे युवाओं, डॉक्टरों और छात्रों को निशाना बनाकर उनका माइंडवॉश कर रहा था। नबी और उसके साथी मुजम्मिल शकील ने शोपियां के रहने वाले यासिर अहमद डार को भी इस नेटवर्क में शामिल किया था और उसका कोड-नाम '45' रखा गया था।
अगस्त 2025 में नबी ने डार को भी 'शहादत' यानी आत्मघाती हमले के लिए तैयार रहने को कहा था, लेकिन जब डार ने हिचकिचाहट दिखाई तो नबी ने उसका फोन लेकर टेलीग्राम की सारी सीक्रेट चैट्स डिलीट कर दी।
इस पूरे आतंकी नेटवर्क को आर्थिक मदद पहुंचाने में लखनऊ की एक महिला डॉक्टर शहीद सईद का नाम सामने आया है, जिसने आरोपी मुजम्मिल शकील से शादी की थी। शकील ने शहीद की अच्छी आर्थिक स्थिति और मिडल ईस्ट में डॉक्टर के रूप में की गई कमाई का फायदा उठाकर उसका माइंडवॉश किया। गैंग के सदस्यों ने उसे अपनी बातों में फंसाकर अपने साथ मिला लिया। उसने हथियार और बम बनाने का सामान (जैसे केमिकल और खाद) खरीदने के लिए लगभग ₹16 लाख नकद दिए थे।
जांच के दौरान एजेंसियों को अल-फलाह यूनिवर्सिटी स्थित लॉकर और डिजिटल डिवाइस से 'हथियारा कैसे बनें-तैयारी' और अल-कायदा की इंस्पायर मैगजीन की 'लोन मुजाहिद पॉकेट बुक' जैसे खतरनाक दस्तावेज मिले हैं।
इन मैनुअल में बिना हथियारों के हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट, संतरी को चुपचाप रास्ते से हटाना, घात लगाकर हमला करना, बम बनाना और गुप्त हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने की पूरी ट्रेनिंग गाइड दी गई थी। कोर्ट ने मई में दाखिल इस चार्जशीट पर संज्ञान लेकर आगे की कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी है।
Updated on:
10 Sep 2026, 9:15 AM IST
Published on:
10 Sep 2026, 8:50 AM IST
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