नई दिल्ली

AAP छोड़कर 7 सांसद गए, फिर भी अरविंद केजरीवाल ने 6 का ही लिया नाम, एक का क्यों नहीं किया जिक्र?

Arvind Kejriwal: AAP के 7 सांसदों के भाजपा में जाने पर अरविंद केजरीवाल ने केवल 6 सीटों पर 'डाका' डालने का आरोप क्यों लगाया? जानें इसके पीछे का पंजाब कनेक्शन और स्वाति मालीवाल की दिल्ली सीट का गणित, जो 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति का हिस्सा है।

2 min read
ANI PHOTO

Arvind Kejriwal News: आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने पर अरविंद केजरीवाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी, लेकिन अपने बयान में उन्होंने विशेष रूप से 6 सीटों पर 'डाका' डालने का जिक्र किया। दरअसल, सात सांसदों-राघव चड्ढा, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, अशोक मित्तल, विक्रमजीत साहनी और संजीव अरोड़ा के पाला बदलने के बावजूद केजरीवाल का 6 का आंकड़ा पंजाब की उन विशिष्ट सीटों से जुड़ा है जो 'आप' के पास थीं। चूंकि स्वाति मालीवाल दिल्ली से राज्यसभा सांसद हैं, इसलिए केजरीवाल ने पंजाब की राजनीति और वहां होने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव को केंद्र में रखते हुए पंजाब की 6 सीटों पर हुए नुकसान को मुख्य मुद्दा बनाया। यही कारण है कि उन्होंने दिल्ली की सीट को इस 'पंजाब के हक' वाले विमर्श से अलग रखते हुए केवल 6 सांसदों की सीटों के चोरी होने का आरोप लगाया।

ये भी पढ़ें

‘ये 6 सीटें किसी के पिताजी की नहीं’, अरंविद केजरीवाल ने अगले साल बदला लेने की दी चेतावनी

'वोट की चोट' से हिसाब बराबर करने का एलान

अरविंद केजरीवाल ने राज्यसभा सांसदों के पाला बदलने को सीधे तौर पर पंजाब के सम्मान और हक से जोड़ दिया है. उन्होंने इस राजनीतिक घटनाक्रम को जनता की उम्मीदों पर 'डाका' करार देते हुए स्पष्ट किया कि इसका निर्णायक फैसला अगले साल फरवरी में होगा। बता दें कि पंजाब विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए केजरीवाल ने संकेत दिया कि पार्टी इस दलबदल को एक बड़े चुनावी मुद्दे के रूप में पेश करेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि पंजाब की जनता इस 'सीट चोरी' का जवाब अपने मताधिकार के जरिए देगी और विश्वासघात करने वालों को 'वोट की चोट' से सबक सिखाएगी

राघव चड्ढा ने राष्ट्रपति से की AAP की शिकायत

राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सात सांसदों के भाजपा में विलय को मिली मंजूरी के बाद राघव चड्ढा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर इस मामले की शिकायत की है। उन्होंने राष्ट्रपति को सौंपे ज्ञापन में आरोप लगाया कि सांसदों का यह दलबदल असंवैधानिक है और इसे मिली आधिकारिक मान्यता लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। चड्ढा ने राष्ट्रपति से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र और जनता के जनादेश की रक्षा के लिए इस विलय को रद्द किया जाना चाहिए।

Also Read
View All