
दिल्ली आबकारी नीति में हाईकोर्ट ने अपनाया ना रास्ता
Excise Policy Case: दिल्ली की आबकारी नीति से जुड़ा मामला इन दिनों चर्चा का बड़ा केंद्र बना हुआ है। इस केस में अरविंद केजरीवाल ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं और इसी कड़ी में स्वर्ण कांता शर्मा पर भी संदेह जताया था। केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने भी साफ कर दिया था कि वे न तो अदालत में पेश होंगे और न ही अपनी तरफ से कोई वकील भेजेंगे। उनके इस फैसले ने पूरे मामले को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है। अब इस मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक के कोर्ट में पेश न होने और वकील न भेजने के फैसले पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया।
कोर्ट ने साफ कह दिया कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक भले ही खुद न आएं, लेकिन सुनवाई नहीं रुकेगी। इसलिए अदालत ने तीन बड़े वकीलों को एमिकस यानी “न्याय मित्र” बनाने का फैसला लिया, जो उनकी तरफ से बात रखेंगे। सुनवाई में तुषार मेहता ने बताया कि तीनों कोर्ट में नहीं हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई के लिए दोनों पक्ष की बात जरूरी है, इसलिए पहले एमिकस की नियुक्ति होगी, फिर CBI की दलीलें सुनी जाएंगी।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि एक आरोपी ने अभी तक अपना जवाब ही जमा नहीं किया। इस पर कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए साफ कह दिया कि अब उसे जवाब देने का मौका नहीं मिलेगा। जज ने कहा कि अब आगे की सुनवाई शुक्रवार को होगी, और तब तक एमिकस की नियुक्ति पूरी कर ली जाएगी। कोर्ट का यह रुख दिखाता है कि अब देरी या टालमटोल बिल्कुल नहीं चलेगी और केस को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।
यह पूरा मामला कथित शराब नीति घोटाले से जुड़ा है। पहले ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल समेत 23 लोगों को राहत दे दी थी, लेकिन केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दे दी। केजरीवाल चाहते थे कि केस किसी दूसरे जज को दिया जाए, लेकिन उनकी यह मांग खारिज हो गई। इसके बाद उन्होंने जज पर पक्षपात का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद नहीं है। इसी वजह से उन्होंने और बाकी नेताओं ने कोर्ट का बहिष्कार करने का फैसला लिया।
Updated on:
05 May 2026 04:05 pm
Published on:
05 May 2026 04:04 pm
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