इस मामले में हाईकोर्ट ने जस्टिस स्वर्णकांता के खिलाफ सभी दलीलों को खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा कि लगाए गए आरोप सिर्फ अनुमान और अटकलों पर आधारित हैं, इनके समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं है। कोर्ट ने साफ किया कि जज के परिवार के सदस्य अपने करियर का चुनाव स्वतंत्र रूप से कर सकते हैं, इससे किसी केस में पक्षपात साबित नहीं होता। साथ ही, किसी कार्यक्रम में शामिल होना भी पक्षपात का प्रमाण नहीं माना जा सकता।