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‘वोट बैंक के लिए तृणमूल कांग्रेस ने मुस्लिम समाज का इस्तेमाल किया’ असदुद्दीन ओवैसी ने बता दिया ममता बनर्जी के हार का कारण

Asaduddin Owaisi ने ममता बनर्जी पर मुसलमानों को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। AIMIM ने हार के बावजूद समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। असम में हिमंत बिस्वा सरमा पर भी निशाना साधा।

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भारत

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Anurag Animesh

May 05, 2026

Asaduddin Owaisi

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैस (Photo-IANS)

Asaduddin Owaisi: पश्चिम बंगाल और असम के चुनावी नतीजों के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इसी बीच असदुद्दीन ओवैसी(Asaduddin Owaisi) ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ममता की 'सेक्युलर और उदार छवि राज्य के बाहर जितनी दिखाई जाती है, हकीकत उससे अलग है। ओवैसी का आरोप था कि बंगाल में मुसलमानों को नागरिक की तरह नहीं, बल्कि सिर्फ वोट बैंक की तरह देखा गया। उनके मुताबिक, अगर तृणमूल कांग्रेस ने समुदाय के साथ बराबरी का व्यवहार किया होता, तो जमीनी स्तर पर विकास ज्यादा दिखता। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के दौरान भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए, जिसने भरोसे को कमजोर किया।

AIMIM नहीं जीत पाई एक भी सीट


इस चुनाव में All India Majlis-e-Ittehad-ul-Muslimeen(AIMIM) को इस बार सीटें नहीं मिलीं, लेकिन ओवैसी ने उन मतदाताओं का धन्यवाद किया जिन्होंने उनकी पार्टी को वोट दिया। उन्होंने खास तौर पर कंडी क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि वहां पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहा और आने वाले समय में मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों में AIMIM मजबूत हो सकती है।

असम के नतीजों पर बोलते हुए ओवैसी ने हिमंत बिस्वा सरमा(Himanta Biswa Sarma) पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके शासन में करीब 50 हजार मुसलमानों को बेघर किया गया, फिर भी जनता ने बीजेपी को दोबारा सत्ता दी। ओवैसी का कहना था कि अगर All India United Democratic Front के पास ज्यादा विधायक होते, तो राज्य के 30% मुस्लिम समुदाय की आवाज ज्यादा मजबूत होती। उन्होंने मुसलमानों से अपील करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि वे अपनी स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व तैयार करें। ओवैसी के मुताबिक, तथाकथित सेक्युलर पार्टियों पर भरोसा करने से अपेक्षित नतीजे नहीं मिल रहे और वोट बिखर जाते हैं।

SIR पर रखी अपनी बात


इसके साथ ही उन्होंने SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) मुद्दे को भी उठाया। उनका कहना था कि जिन सीटों पर SIR हुआ, वहां सत्ताधारी दलों को नुकसान हुआ। उन्होंने एमके स्टालिन और ममता बनर्जी की हार का उदाहरण देते हुए कहा कि नागरिकता और वोटर लिस्ट से जुड़े ऐसे कदमों को लेकर सरकारों को सावधानी बरतनी चाहिए।