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कैसे बंगाल में हार गईं ममता बनर्जी, कर्नाटक CM सिद्धारमैया ने 2 वजह बताई, बोले- 91 लाख नाम भी काटे गए थे

West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में ममता बनर्जी की हार पर सिद्धारमैया का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने हार की दो वजह बताई है।

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The state government has no role in determining metro fares

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया। (Photo-IANS)

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। 15 साल से सत्ता में रही ममता बनर्जी की पार्टी को इस बार हार का सामना करना पड़ा है। इस नतीजे के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस हार के पीछे दो बड़े कारण बताए हैं, जिनमें एंटी-इनकंबेंसी और वोटर लिस्ट में बदलाव शामिल हैं।

15 साल की सत्ता और एंटी-इनकंबेंसी फैक्टर

सिद्धारमैया का कहना है कि ममता बनर्जी पिछले करीब 15 साल से सत्ता में थीं, ऐसे में जनता के बीच बदलाव की भावना पैदा होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक एक ही सरकार रहने से लोगों में असंतोष बढ़ा और यही इस चुनाव में देखने को मिला।

उन्होंने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, करीब 91 लाख वोट हटाए जाने की बात सामने आई, जो चुनाव परिणाम को प्रभावित करने में कामयाब रही।

बीजेपी की ऐतिहासिक जीत

इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने इतिहास रच दिया। पार्टी ने 207 सीटें जीतकर पहली बार राज्य में सरकार बनाने की स्थिति हासिल की।

इससे पहले बीजेपी बंगाल में एक सीमित ताकत मानी जाती थी। यह जीत पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है।

दूसरी ओर, केरल से कांग्रेस के लिए राहत भरी खबर आई है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने शानदार जीत दर्ज की है। यह जीत इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले चुनाव में कांग्रेस सत्ता में वापसी नहीं कर पाई थी।

सिद्धारमैया ने इस जीत को उम्मीद से बेहतर बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने जितना सोचा था, उससे ज्यादा समर्थन मिला है। केरल में यह जीत 10 साल बाद सत्ता में वापसी का रास्ता खोलती है।

तमिलनाडु में विजय का उभार

तमिलनाडु में इस बार एक नया चेहरा चर्चा में रहा। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) ने 108 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया।

हालांकि पार्टी बहुमत से 10 सीट दूर रह गई, लेकिन उसका प्रदर्शन ऐतिहासिक माना जा रहा है। सिद्धारमैया का मानना है कि युवाओं ने बदलाव की उम्मीद में विजय का साथ दिया। यही वजह रही कि पारंपरिक द्रविड़ पार्टियां पीछे छूट गईं।