शिवसेना सांसद संजय राउत का कहना है कि बीजेपी एक विभाजनकारी पार्टी है, इसका अहसास हमें काफी देर से हुआ। संजय राउत ने कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार ने तो 25 साल पहले ही बता दिया था।
नई दिल्ली। दो दशक से अधिक समय तक साथ रहने के बाद शिवसेना ने साल 2019 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी का साथ छोड़ दिया था। कहा जाता है कि दोनों पार्टियों के बीच सीएम की कुर्सी को लेकर सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद से शिवसेना ने बीजेपी पर निशाना साधने का कोई मौका नहीं छोड़ा। अब शिवसेना सांसद संजय राउत का कहना है कि बीजेपी एक विभाजनकारी पार्टी है, इसका अहसास हमें काफी देर से हुआ। संजय राउत ने कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार ने तो 25 साल पहले ही बता दिया था कि बीजेपी विभाजनकारी है, लेकिन हमें इसका अहसास दो साल पहले ही हुआ है। बता दें कि यह कोई पहला मौका नहीं है जब संजय राउत ने बीजेपी पर हमला किया है। इससे पहले भी वे कई मौकों पर बीजेपी को घेर चुके हैं।
एक कार्यक्रम में कही ये बात
संजय राउत ने यह बयान शरद पवार के द्वारा राजनीतिक रैलियों में दिए गए भाषणों पर आधारिक एक किताब 'नेमकेची बोलाने' के विमोचन पर कही। शिवसेना सांसद राउत ने कहा कि करीब 25 साल पहले शरद पवार ने कहा था कि बीजेपी देश में एकता नहीं चाहती, इसका तरीका विभाजनकारी है। तब हमें यह बात समझ नहीं आई थी, लेकिन दो साल पहले हमें इसका अहसास हुआ। राउत ने कह कि किताब का नाम इतना अच्छा है कि हमें इसे पीएम मोदी को गिफ्ट करना चाहिए। उन्हें इससे कुछ चीजें जानने की आवश्यकता है।
2019 में अलग हुई थीं दोनों पार्टियां
बता दें कि महाराष्ट्र में शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी दो दशक से अधिक समय तक साथ रहीं। वहीं साल 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में शिवसेना ने भाजपा का साथ छोड़ दिया। इसके साथ ही शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर राज्य में सरकार बनाई है। इसके बाद से दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर निशाना साधने का कोई मौका नहीं छोड़ती हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कुर्सी की चाहत ने दोनों पार्टियों के बीच में दूरियां पैदा कर दीं। दरअसल 2019 विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियां एक साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही थी, लेकिन उनके बीच सीएम पद को लेकर चीजें साफ नहीं हो पा रही थीं। दोनों पार्टियां अपने उम्मीदवार को सीएम बनाना चाहती थीं। हालांकि बाद में दोनों पार्टियों के नेताओं को ढाई-ढाई साल सीएम बनाने की बात भी सामने आई, लेकिन आखिर में दोनों पार्टियों ने अपने रास्ते अलग कर लिए।