Ashok Kharat case: नासिक के कथित आध्यात्मिक गुरु अशोक खरात मामले में SIT के बड़े खुलासे सामने आए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी के मोबाइल और लैपटॉप से मिला डेटा पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर सकता है, जिससे सियासत में हलचल तेज हो गई है।
Ashok Kharat case: खुद को आध्यात्मिक गुरु बताने वाले अशोक खरात के मामले में आए दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं। फिलहाल आरोपी बाबा को हिरासत में लेने के बाद SIT की तरफ से ऐसा दावा किया जा रहा है, जिससे वाकई में प्रदेश की सियासत में भूचाल आ सकता है। दरअसल, एसआईटी (SIT) ने अदालत में स्पष्ट किया है कि आरोपी के मोबाइल और लैपटॉप से बरामद डेटा इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने में सबसे अहम कड़ी साबित होगा।
जांच एजेंसियों के अनुसार, अशोक खरात के जब्त किए गए डिवाइस अब फॉरेंसिक टीम के पास हैं। एसआईटी ने अदालत को बताया कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है, लेकिन उसके मोबाइल और लैपटॉप से भारी संख्या में डेटा रिकवर किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, मोबाइल में कई प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम कोडवर्ड में सेव किए गए हैं। पुलिस को शक है कि ये कोडवर्ड उन रसूखदार राजनेताओं और अधिकारियों के हो सकते हैं, जिनका खरात के 'दरबार' में आना-जाना था। जांच अब पारंपरिक पूछताछ से आगे बढ़कर डिजिटल फॉरेंसिक तक पहुंच चुकी है। माना जा रहा है कि इन डिवाइस में छिपे चैट्स, कॉल रिकॉर्ड्स और वीडियो किसी बड़े संगठित सिंडिकेट की ओर इशारा कर रहे हैं।
अदालत में सरकारी वकीलों ने बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए। अभियोजन पक्ष का दावा है कि अशोक खरात कई महिलाओं के यौन शोषण का मुख्य साजिशकर्ता है। रसूख और आस्था की आड़ में वह महिलाओं को अपना शिकार बनाता था। सरकारी वकील ने कोर्ट में दलील दी कि आरोपी की संपत्तियों और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जांच के लिए उसकी हिरासत अनिवार्य है, क्योंकि वह अब भी कई राज दबाए बैठा है।
वहीं, अशोक खरात के वकील ने पुलिस हिरासत बढ़ाए जाने का विरोध किया। बचाव पक्ष का तर्क था कि पुलिस पहले ही कई अहम चीजें जब्त कर चुकी है और आरोपी से पूछताछ के लिए और समय की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने आरोपों की गंभीरता और जांच के व्यापक दायरे को देखते हुए खरात को पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
नासिक के इस केस में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या डिजिटल साक्ष्यों में उन 'बड़े नामों' की पुष्टि होगी जिनकी चर्चा अब तक सिर्फ गलियारों में हो रही थी? अगर फॉरेंसिक रिपोर्ट में किसी वीआईपी या राजनीतिक चेहरे का सीधा संबंध सामने आता है, तो यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा भूचाल ला सकता है। फिलहाल, पूरी नजर फॉरेंसिक टीम की उस रिपोर्ट पर टिकी है, जो खरात के 'डिजिटल साम्राज्य' का कच्चा चिट्ठा खोलेगी।