नई दिल्ली

वीबी-जीरामजी पर राज्यों ने रखीं शर्तें, 60:40 फंडिंग से लेकर मजदूरी तक उठाए सवाल

केंद्र सरकार की नई ग्रामीण रोजगार योजना विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जीरामजी) लागू होने से पहले ही राज्यों ने इसके कई प्रावधानों पर सवाल खड़े कर दिए हैं
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Updated: 30 Jun 2026, 2:35 PM IST
VB-Jiramji

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की नई ग्रामीण रोजगार योजना विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जीरामजी) लागू होने से पहले ही राज्यों ने इसके कई प्रावधानों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता चक्रधर बुद्धा को सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत पिछले दिनों सरकार की ओर से दिए जवाब से पता चला है कि 13 राज्यों ने योजना के वित्तीय ढांचे, मजदूरी दर, कृषि सीजन में प्रस्तावित 60 दिन के गैर-कार्यकाल (ब्लैकआउट पीरियड) और लंबित भुगतानों को लेकर केंद्र सरकार को कई सुझाव और आपत्तियां भेजी हैं। उधर, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि संबंधित पक्षों से गहन परामर्श किए बिना ही संसद से मनरेगा को समाप्त करने का विधेयक जबरन पारित कराया, जिसका अब भाजपा शासित राज्य भी कर रहे हैं।

दरअसल, आरटीआई के तहत मिली जानकारी में इस योजना में सबसे बड़ी आपत्ति प्रस्तावित 60:40 फंडिंग व्यवस्था को लेकर सामने आई है। भाजपा शासित बिहार और मध्यप्रदेश ने इस व्यवस्था की समीक्षा की मांग की है। जबकि जेएमएम-कांग्रेस शासित झारखंड ने स्पष्ट कहा कि मौजूदा वित्तीय स्थिति में 40 फीसदी राज्य अंश वहन करना उसके लिए कठिन होगा। उत्तराखंड ने मजदूी कंपोनेंट में सौ फीसदी हिस्सा केन्द्र से वहन करने की मांग की है। जबकि सिक्किम ने अपनी विशेष परिस्थितियों का हवाला देते हुए केंद्र-राज्य लागत साझेदारी पर पुनर्विचार का सुझाव दिया है।

मजदूरी बढ़ाने की मांग

आरटीआई दस्तावेज के मुताबिक पांच राज्यों ने ग्रामीण मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने की मांग भी की है। बिहार ने दैनिक मजदूरी 255 से बढ़ाकर 413 रुपए करने का प्रस्ताव दिया है, जबकि जम्मू-कश्मीर ने इसे 272 से बढ़ाकर 311 रुपए करने की मांग की है। झारखंड, पंजाब और उत्तराखंड ने भी स्थानीय बाजार दरों और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप मजदूरी बढ़ाने का सुझाव दिया है।

60 दिन के गैर-कार्यकाल का विरोध

कृषि के व्यस्त मौसम में प्रस्तावित 60 दिन के गैर-कार्यकाल का भी कई राज्यों ने विरोध किया है। झारखंड, पंजाब, कर्नाटक और तेलंगाना ने इस प्रावधान पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। वहीं लगभग सभी राज्यों ने मनरेगा के तहत मजदूरी, सामग्री और प्रशासनिक मद के लंबित भुगतान समय पर जारी करने की मांग उठाई है।

ग्रामीण विकास मंत्री का गृह राज्य भी उठा रहा सवाल: जयराम

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि वीबी-जीरामजी को पर्याप्त परामर्श के बिना लागू किया गया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश, बिहार और उत्तराखंड जैसे भाजपा शासित राज्यों ने अतिरिक्त वित्तीय बोझ पर चिंता जताई है, जबकि कई राज्यों ने ब्लैकआउट अवधि और मजदूरी बढ़ाने की मांग उठाई है। रमेश ने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का गृह राज्य मध्यप्रदेश भी इस योजना के प्रावधानों पर सवाल उठा रहा है।

Updated on:
30 Jun 2026, 2:35 PM IST
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