Rekha Government: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की रेखा सरकार को उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के खिलाफ दायर सभी 7 याचिकाएं वापस लेने की अनुमति दे दी है। यह याचिकाएं आम आदमी पार्टी की सरकार ने दायर की थीं।
Rekha Government: देश की सर्वोच्च अदालत ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार को उपराज्यपाल (एलजी) के खिलाफ दायर सात याचिकाओं को वापस लेने की अनुमति दे दी। ये याचिकाएं आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार ने दायर की थीं। जिनमें दिल्ली के प्रशासन में एलजी की भूमिका और अधिकारों को लेकर संवैधानिक सवाल उठाए गए थे। इन मामलों में यमुना नदी की सफाई, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और विभिन्न समितियों में एलजी की अध्यक्षता जैसे विषय शामिल थे।
गुरुवार को दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि वह इन मामलों की तत्काल सुनवाई करे, क्योंकि दिल्ली में हाल ही में सत्ता परिवर्तन हुआ है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को जानकारी दी कि अब नई सरकार की प्राथमिकताएं और दृष्टिकोण अलग हैं। ऐसे में पिछली सरकार द्वारा दायर याचिकाएं आगे नहीं बढ़ाई जाएंगी। भाटी ने अदालत को सूचित किया कि सातों याचिकाएं वापसी के लिए सूचीबद्ध की जा रही हैं।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को तर्क दिया था कि अब इन मामलों के चलते अदालत को परेशान नहीं होना पड़ेगा। इसपर न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा था कि हम इन सभी मामलों पर शुक्रवार को सुनवाई करेंगे। इसके साथ अदालत ने एनजीटी के 19 जनवरी 2023 के उस आदेश के खिलाफ दिल्ली सरकार की याचिका पर सुनवाई करने में सहमति दिखाई। साथ ही उस याचिकाकर्ता को नोटिस जारी किया था। जिसके आवेदन पर न्यायाधिकरण ने आदेश पारित किया था।
दरअसल, एनजीटी ने दिल्ली में यमुना नदी में कायाकल्प से संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की थी। इस कमेटी का नेतृत्व करने के लिए उपराज्यपाल से अनुरोध किया गया था। एनजीटी ने अपने पत्र में कहा था "हम दिल्ली के उपराज्यपाल से अनुरोध करते हैं। जो DDA के अध्यक्ष और संविधान के अनुच्छेद 239 के तहत दिल्ली के प्रशासक हैं। वे समिति का नेतृत्व करें।" इसी आदेश को याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी के उस आदेश पर तत्काल रोक लगाते हुए मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था।
इन याचिकाओं में एक महत्वपूर्ण मामला यमुना नदी के पुनरुद्धार से संबंधित था। इस मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा उपराज्यपाल को एक उच्च स्तरीय समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। दिल्ली सरकार ने इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में NGT अधिनियम की धारा 22 के तहत चुनौती दी थी।
AAP सरकार का तर्क था कि उपराज्यपाल की संवैधानिक भूमिका सीमित है और वह केवल तीन विषयों पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि पर ही अधिकार रखते हैं। सरकार ने कहा था कि इस आदेश से दिल्ली की निर्वाचित सरकार की प्रशासनिक शक्ति कमजोर हो रही है और इससे संविधान की भावना का उल्लंघन होता है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने सरकार की याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया और शुक्रवार को निर्णय देते हुए सभी याचिकाओं को वापस लेने की अनुमति दे दी। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि अब जबकि नई सरकार सत्ता में है और वह इन मामलों को आगे नहीं ले जाना चाहती। ऐसे में न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाना व्यर्थ होगा।