नई दिल्ली

शादी के 4 महीने बाद ही पत्नी को दे दिया जहर… सुप्रीम कोर्ट ने पलटा इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

Supreme Court: नवविवाहिता की दहेज हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे अपराध समाज के लिए गंभीर खतरा हैं। इसके साथ ही आरोपी की जमानत याचिका रद कर दी।
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सुप्रीम कोर्ट ने पलटा इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला।

Supreme Court: दहेज विवाद में नवविहाहिता की संदिग्ध मौत के मामले में आरोपी की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले को यह कहते हुए पलट दिया कि दहेज जैसी प्रथा शादी जैसे पवित्र रिेश्ते को “व्यावसायिक सौदे” में बदल रही है। साथ ही सर्वोच्च अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर कहा कि ऐसे मामलों में बिना तथ्यों और सबूतों पर विचार किए बिना कदम उठाने से समाज पर गलत असर पड़ता है और न्यायिक प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े होते हैं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला पलट दिया। इस मामले मृतका के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और आर. महावेदन की बेंच ने की।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

लाइव लॉ के अनुसार, फैसले में हाईकोर्ट की बेंच ने दहेज प्रथा को समाज में मौजूद एक गंभीर बुराई बताया। अदालत ने कहा, “विवाह वास्तव में विश्वास, सम्मान और एक दूसरे के साथ पर आधारित एक पवित्र संस्था है, लेकिन आज इसे दुर्भाग्य से एक व्यावसायिक लेन-देन की तरह देखा जा रहा है। दहेज जैसी प्रथाओं की वजह से विवाह जरूरतें पूरी करने का जरिया बन चुका है।” कोर्ट ने आगे कहा कि दहेज के नाम पर होने वाली मौतें संविधान के आर्टिकल 14 और 21 का सीधा उल्लंघन है। अदालत ने यह भी कहा कि ये अपराध सोसायटी में नैतिकता को कम करते हैं। साथ ही महिलाओं के खिलाफ हिंसा को सामान्य बनाते हैं और एक सभ्य समाज की नींव को हिला देते हैं। "

हाईकोर्ट के फैसला रद करने का कारण क्या था?

दरअसल, मृतका के पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इलाहबाद हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता और सबूतों पर ज्यादा सोच विचार नहीं किया और आरोपी को जमानत दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने इसी कारण से इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले में विकृति बताते हुए इसे निरस्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मृतका का अंतिम बयान, FSL रिपोर्ट और मामले की परिस्थितियां जमानत को सही ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं थीं।

न्यायमूर्ति महादेवन ने हाईकोर्ट के गलत निर्देश पर कहा "जब साक्ष्य शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न की तरफ साफ संकेत दे रहे हों तो ऐसे गंभीर अपराधों के मुख्य अपराधी को जमानत पर रिहा रहने की अनुमति देना न सिर्फ मुकदमे की निष्पक्षता को खतरे में डाल सकता है, बल्कि क्रिमिनल जस्टिस प्रशासन में जनता का विश्वास भी खत्म कर सकता है।" अदालत ने आगे कहा "मामले की गंभीरता, मृत्यु से पहले का बयान और सबूतों पर विचार करने में हाईकोर्ट की चूक इस आदेश को विकृत और अस्थिर बना देती है।"

अब जानिए क्या है पूरा मामला?

यह मामला उत्तर प्रदेश से जुड़ा है। याचिका के अनुसार 22 फरवरी 2023 को युवती की शादी हुई थी। मृतका के पिता के अनुसार, शादी के बाद से ही बेटी के ससुराल वालों ने फॉर्च्यूनर कार की मांग शुरू कर दी थी। इसमें उनका दामाद भी शामिल था। इसके लिए उनकी बेटी को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया जाता था। 5 जून 2023 की रात को युवती ने अपनी बहन को फोन पर बताया था कि उसे जबरदस्ती बदबूदार कोई जहरीला पदार्थ पिलाया गया है और इसके कुछ घंटे बाद ही उसकी मौत हो गई। फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट में युवती के शरीर में एल्युमिनियम फॉस्फाइड जहर मौजूद था। इस जहर के प्रयोग से जहरीले कीटनाशक बनाए जाते हैं और इसको खाना जानलेवा माना जाता है। इस रिपोर्ट से युवती के आखिरी बयान की पुष्टि हुई।

Updated on:
29 Nov 2025 06:24 pm
Published on:
29 Nov 2025 06:10 pm
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