नई दिल्ली

खाड़ी में टेंशन: भारत के 10.68 अरब डॉलर के कृषि और डेयरी निर्यात पर संकट के बादल

Feature image

नई दिल्ली। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष से पैदा हुए भू-राजनीतिक तनाव ने भारत के कृषि और डेयरी निर्यात पर बड़ा खतरा खड़ा कर दिया है। खाड़ी और मध्य पूर्व के देशों को होने वाला 10.68 अरब डॉलर का निर्यात अब लॉजिस्टिक्स बाधाओं और बढ़ती लागत के चलते दबाव में आ गया है। वहीं, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज के बंद होने के कारण लौट रहे मालवाहक जहाजों के लिए सरकार विशेष राहत उपाय भी लागू कर रही है।

दरअसल, मध्य पूर्व, विशेषकर गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के देश जैसे यूएई, सऊदी अरब, ओमान, कुवैत, कतर और बहरीन और इसके साथ ईरान, इराक और यमन, भारतीय कृषि और डेयरी उत्पादों के प्रमुख बाजार हैं। इन देशों में भारत के कुल कृषि निर्यात का करीब 20.5 फीसदी हिस्सा जाता है। करीब एक महीने बाद भी हालात सामान्य नहीं होने से भारतीय निर्यातकों पर संकट गहराने लगा है।

इन उत्पादों पर सबसे ज्यादा असर

  1. बासमती चावल

2. भैंस का मांस

3. ताजे फल और सब्जियां

4. मसाले

5. डेयरी उत्पाद

सरकार अलर्ट, इंटर-मिनिस्ट्री टीम सक्रिय

स्थिति की निगरानी के लिए 2 मार्च को सरकार ने ‘सप्लाई चेन लचीलापन’ के लिए अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) सक्रिय किया है। इसमें पोत परिवहन, पेट्रोलियम, वित्तीय सेवा, डीपीआईआईटी, सीबीआईसी, विदेश मंत्रालय और आरबीआई सहित कई एजेंसियां शामिल हैं। यह समूह नियमित समीक्षा बैठकों, दैनिक रिपोर्ट और निर्यातकों के लिए समर्पित संचार चैनल के जरिए हालात पर नजर रख रहा है।

निर्यातकों को राहत के उपाय

1. रिलीफ योजना (19 मार्च): डीजीएफटी ने निर्यात जोखिम कम करने के लिए विशेष योजना शुरू की, जिसे ईसीजीसी के जरिए लागू किया जा रहा है।

2. समयसीमा में राहत: निर्यात दायित्व पूरा करने की समय सीमा 31 अगस्त 2026 तक बढ़ाई गई, वह भी बिना अतिरिक्त शुल्क के।

3. कस्टम प्रक्रिया आसान: सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने फंसे माल के लिए सरल कस्टम क्लीयरेंस, ट्रांजिट और री-एक्सपोर्ट की सुविधा दी।

4. हॉर्मूज संकट पर विशेष राहत: स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज बंद होने से लौट रहे कार्गो के लिए बर्थिंग, ऑफलोडिंग, शिपिंग बिल रद्द करने और बैक-टू-टाउन की सुविधा दी गई।

5. बंदरगाहों पर विशेष व्यवस्था: प्रमुख बंदरगाहों पर 24×7 नोडल अधिकारी, अतिरिक्त स्टोरेज, जल्दी खराब होने वाले सामान की प्राथमिकता और शुल्क में छूट जैसे कदम लागू किए गए।

6. फंसे कार्गो को राहत: न्हावा शेवा, मुंद्रा और कांडला जैसे बंदरगाहों पर बैक-टू-टाउन सुविधा आसान की गई और कुछ मामलों में जांच व जुर्माना भी माफ किया गया।

7. वैकल्पिक मार्गों की तलाश: विदेश मंत्रालय वैकल्पिक समुद्री रास्ते खोज रहा है, जबकि पेट्रोलियम मंत्रालय 24×7 मॉनिटरिंग से जहाजों की ट्रैकिंग कर रहा है।

निर्यातकों ने व्यवधानों की रिपोर्ट सरकार को दी

सरकार पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में विकसित हो रही भू-राजनीतिक स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है, जिसमें भारत के बाहरी व्यापार, शिपिंग मार्गों और लॉजिस्टिक्स श्रृंखलाओं पर इसके प्रभाव भी शामिल हैं। निर्यातकों ने माल ढुलाई दरों में वृद्धि, युद्ध-जोखिम अधिभार लगाए जाने, कंटेनरों की कमी, शिपमेंट शेड्यूल में देरी और बंदरगाहों पर भीड़भाड़ जैसे व्यवधानों की सरकार को रिपोर्ट दी है।

-जितिन प्रसाद, केंद्रीय वाणिज्य राज्य मंत्री (राज्यसभा में एक सवाल पर लिखित जवाब में दिया)

Updated on:
30 Mar 2026 12:26 pm
Published on:
30 Mar 2026 12:26 pm