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‘मैं और आशुतोष तो पिट लिए, अब सौरव का नंबर आएगा’- बोले अभिजीत दीपके, फिर मार्च का किया ऐलान

Abhijeet Dipke: 'मैं और आशुतोष तो पिट गए, अब सौरव की बारी है...' कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके का तंज। 5 सितंबर को दिल्ली में इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक निकलेगा बड़ा मार्च। पढ़ें पूरी खबर...
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Cockroach Janta Party, Delhi Police Headquarters March

जयपुर हमले का जिक्र होने पर अभिजीत दीपके का बड़ा बयान / फोटो सोर्स- सोशल मीडिया अकाउंट (@himanshi__bisht और @AshutoshRanka)

Ashutosh Ranka: 'हम तो मार खाने वाले लोग हैं साहब… मैं पिट लिया, आशुतोष पिट लिया, अब बस सौरव बचा है, उसका नंबर भी जल्द आ जाएगा।' जेन-जी के एक मंच से कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके का यह बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसके साथ ही छात्रों से जुड़े गंभीर मुद्दों और अपनी दो प्रमुख मांगों को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने एक बार फिर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आने वाली 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर संगठन के कार्यकर्ता दिल्ली में इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक शांति मार्च निकालेंगे।

'हम पिटने वाले लोग हैं, पिट लेंगे…'

कार्यक्रम के दौरान जब मीडिया ने जयपुर और दिल्ली के जंतर-मंतर में हुए पिछले विवादों व हिंसा का जिक्र करते हुए सुरक्षा की चिंता पर सवाल पूछा, तो अभिजीत दीपके ने कहा कि वे पिट कर आने वाले लोग हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वे खुद और आशुतोष पहले ही पिट चुके हैं और अब सिर्फ सौरव बचा है, जिसका नंबर भी जल्द आ जाएगा। वहीं आशुतोष रांका ने कहा कि उन्हें किसी हमले या डर की कोई चिंता नहीं है। जयपुर की घटना के बाद भी वे लगातार जोधपुर, बाड़मेर और बीकानेर के दौरों में लगे हुए हैं।

क्या हैं 5 सितंबर के मार्च 'इंडिया गेट 1.0' की मुख्य मांगें?

अभिजीत दीपके ने बताया कि यह आंदोलन कोई शौक नहीं बल्कि मजबूरी में उठाया गया कदम है। आने वाली 5 सितंबर को निकाले जा रहे 'इंडिया गेट 1.0' मार्च के जरिए सरकार के सामने मुख्य रूप से दो मांगें रखी जा रही हैं। पहली मांग यह है कि विभिन्न हादसों या मानसिक दबाव के कारण अपनी जान गंवाने वाले छात्रों के पीड़ित परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए, क्योंकि इनमें से अधिकांश छात्र लोअर मिडिल क्लास से आते हैं और उनके परिवार भारी कर्ज में डूबे हैं। दूसरी मांग के तहत हाल ही में हुए प्रदर्शनों के दौरान अपने अधिकारों की मांग कर रहे निर्दोष छात्रों पर दर्ज किए गए सभी पुलिस केस और FIR तुरंत वापस लेने का दबाव बनाया जाएगा।

'नेताओं को खरीदने में करोड़ों, तो बेबस परिवारों को क्यों नहीं'

आकांक्षा चतुर्वेदी नामक एक मृत छात्रा के परिवार से मुलाकात का जिक्र करते हुए दीपके ने बताया कि बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए उसके पिता ने 15 लाख रुपये का लोन लिया था। बेटी के जाने के बाद उसके पिता को पैरालिसिस और हार्ट अटैक आ चुका है। दीपके ने सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जब विधायकों और सांसदों की खरीद-फरोख्त में 50 से 100 करोड़ रुपये खर्च किए जा सकते हैं, तो कर्ज के बोझ तले दबे इन बेबस परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देना सरकार के लिए कोई बड़ा अमाउंट नहीं है।

राजस्थान के स्कूलों पर उठाए गंभीर सवाल

राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए आशुतोष रांका ने राज्य की बदहाल स्थिति पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के 80 साल बाद भी राजस्थान की राजधानी जयपुर में ऐसे सरकारी स्कूल चल रहे हैं जो भैंसों के तबेले जैसे दिखाई देते हैं। उन्होंने साफ किया कि संगठन कोई चुनाव लड़ने या सरपंच बनने के लिए वोट नहीं मांग रहा है, बल्कि वे केवल ग्रामीण और सरकारी स्कूलों की खस्ता हालत सुधारने की लड़ाई लड़ रहे हैं।

कानूनी प्रक्रिया और वादे से मुकरने का आरोप

कॉन्क्लेव में सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट की 18 अगस्त की सुनवाई का हवाला देते हुए बताया कि शीर्ष अदालत ने संविधान के आर्टिकल 142 की एक्स्ट्राऑर्डिनरी पावर का इस्तेमाल कर केस खत्म करने का विकल्प दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से देशभर के केसों की सूची मांगी थी, लेकिन सरकारी वकीलों की तरफ से इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। केंद्रीय मंत्रियों द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में किए गए वादे भी पूरे नहीं हुए। इसीलिए मजबूरी में छात्रों को एक बार फिर सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।