नई दिल्ली

राज्यसभा की 10 सीटों में छिपा 2027 का यूपी प्लान

पार्टी 2027 के लिए जातीय, क्षेत्रीय और राजनीतिक समीकरणों को साध कर चुनावी सोशल इंजीनियरिंग के बड़े अवसर के रूप में ले रही है। खासतौर पर ब्राह्मण और गैर-यादव पिछड़े वर्गों को मजबूत संदेश देने और दलित सामाजिक आधार में सेंध बनाए रखने पर नजर है
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अभिषेक सिंघल

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा की 10 सीटों का चुनाव भाजपा के लिए सिर्फ उच्च सदन में संख्या बनाए रखने का मामला नहीं है। इन सीटों के जरिए पार्टी 2027 के लिए जातीय, क्षेत्रीय और राजनीतिक समीकरणों को साध कर चुनावी सोशल इंजीनियरिंग के बड़े अवसर के रूप में ले रही है। खासतौर पर ब्राह्मण और गैर-यादव पिछड़े वर्गों को मजबूत संदेश देने और दलित सामाजिक आधार में सेंध बनाए रखने पर नजर है। गौरतलब है कि 25 नवंबर को जिन 10 राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें भाजपा के आठ, सपा और बसपा के एक-एक सदस्य हैं। चुनाव 16 अक्टूबर को होगा।

स्थानीय जातीय समीकरण साधने की कोशिश

भाजपा राज्यसभा की सूची पर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए समीकरण साधने की दृष्टी से विचार कर रही है। उत्तरप्रदेश में पार्टी की रणनीति के जानकार बताते है कि वहां इस समय भाजपा की पहली प्राथमिकता ब्राह्मण मतदाताओं की नाराजगी दूर करना और दूसरी बड़ी प्राथमिकता गैर-यादव ओबीसी सामाजिक आधार को साधना है। लोधी, कुर्मी, मौर्य-शाक्य-सैनी, निषाद और राजभर जैसे समूहों को साधने में राज्यसभा की सीटें राजनीतिक संदेश का माध्यम बन सकती हैं। वहीं क्षेत्रवार भी टिकटों का वितरण संतुलित रखने की चुनौती है। पश्चिमी यूपी में आरएलडी के साथ गठबंधन के कारण जाट समीकरण अलग महत्व रखता है। पूर्वांचल में निषाद और राजभर, मध्य यूपी में लोधी-पिछड़ा समीकरण और बुंदेलखंड में अलग सामाजिक समीकरण भाजपा के सामने हैं।

ये नाम हैं चर्चा में

संभावित प्रत्याशियों के रूप में चर्चा में पूर्व सांसद और भाजपा महामंत्री हरीश द्विवेदी, भाजपा महामंत्री स्मृति ईरानी, केन्द्रीय मंत्री बीएल वर्मा, हरदीप सिंह पुरी, सत्यपाल सिंह, डॉ. संजीव बालियान, सुरेश राणा, राजेंद्र अग्रवाल,कौशल किशोर, राजवीर सिंह, राघवेंन्द्र सिंह, पूर्व डीजीपी बृज लाल, गीता शाक्य, सीमा द्विवेदी व विनय सहस्त्रबुद्धे का नाम चर्चा में है।

सीट और वोट की गणित

कुल सदस्य 403
वर्तमान में 396
एक सीट के लिए मत- करीब 37
एनडीए 288
भाजपा255
अपना दल(एस)13
आरएलडी 9
सुभासपा 6
निषाद पार्टी 5
वहीं जनसत्ता दल लोकतांत्रिक 2 व तीन असम्बद्ध विधायकों के समर्थन की भी उम्मीद -कुल 293
सपा 103
सपा101
कांग्रेस 2

भाजपा सात सीटें आसानी से जीत सकती है। वहीं सपा दो। भाजपा को आठवें प्रत्याशी के लिए करीब पांच विधायकों का तो सपा को तीसरे प्रत्याशी के लिए 8 का अतिरिक्त समर्थन चाहिए होगा। दूसरी वरीयता के वोट भी इस एक सीट का फैसला कर सकते हैं। कुछ सूत्रों के अनुसार भाजपा नवां प्रत्याशी भी खड़ा कर सकती है।

Updated on:
03 Oct 2026 02:15 pm
Published on:
03 Oct 2026 02:15 pm