वृंदावन में हुई केन्द्रीय टोली की बैठक में शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की हुई समीक्षा
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष में मिल रहे समर्थन से सकारात्मक तरीके से जमीन स्तर पर सामाजिक सद्भाव आगे बढ़ाने के तरीकों पर काम करेगा। संघ इसके लिए देश भर में हिन्दू सम्मेलनों, युवा सम्मेलनों का आयोजन करेगा। संघ के केन्द्रीय पदाधिकारियों और केन्द्रीय टोली की वृंदावन में चार दिवसीय बैठक में शुक्रवार को सम्पन्न हुई। पांच जनवरी से 9 जनवरी तक चार दिनों में दो अलग- अलग बैठकें हुई जिनमें संघ के शीर्ष स्तर के पदाधिकारियों के साथ ही विविध संगठनों के भी कुछ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। वृंदावन के केशवधाम में हुई इस बैठक में शताब्दी वर्ष के तहत हुए व्यापक गृह सम्पर्क अभियान व कुछ प्रान्तों में आयोजित हो चुकीं प्रमुख जन गोष्ठियों की समीक्षा भी की गई।
बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघ चालक मोहन भागवत और सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित सभी छह सह सर कार्यवाह व अन्य केन्द्रीय पदाधिकारी मौजूद रहे। इस बैठक में भाजपा के संगठन महामंत्री बीएल संतोष व अन्य संगठनों के भी कुछ पदाधिकारी भी मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार, बैठक का मुख्य एजेंडा जमीनी और ग्रामीण स्तर पर सामाजिक सद्भाव और वैचारिक विस्तार रहा। बैठक में पूरे देश में शहरी और ग्रामीण स्तरों पर आयोजित किए जा रहे हिंदू सम्मेलनों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या से संबंधित घटनाओं पर विकट हालात पर चर्चा के साथ उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई।
शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में समाज और खास तौर पर युवाओं से मिल रहे समर्थन को एक सकारात्मक दिशा देने पर भी विचार हुआ। देश भर में इसके लिए युवाओं को जोड़ने के लिए विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। दौरान सामाजिक बुराइयों के खिलाफ कैसे अभियान चला सकते हैं और समाज के सभी वर्गों को एक साथ ला सकते हैं। बैठक में संगठनात्मक विस्तार, शाखाओं की संख्या बढ़ाने और समकालीन मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया है।
संघ में पिछले कुछ समय से संगठनात्मक ढांचे में परिवर्तन को लेकर भी चर्चा चल रही है और लगातार बढ़ते काम के चलते निचले स्तर पर अधिक प्रभावी कार्य करने की दृष्टि से संगठनात्मक रचना में बदलाव को लेकर सुझावों पर विचार किया जा रहा है। प्रांत स्तर पर नई रचना जोड़े जाने का प्रस्ताव है। अभी ग्रामीण क्षेत्र में गांव, मंडल, खंड, जिला, विभाग होते हैं। वहीं शहरी क्षेत्र में नगर, बस्ती, भाग, महानगर होते हैं। महानगर को विभाग के समकक्ष माना जाता है। एक प्रान्त में करीब छह से आठ विभाग होते हैं। प्रान्त एक साथ मिल कर केन्द्र के कार्यक्रमों का क्रियान्वयन करता है। गौरतलब है कि लगभग एक दशक पहले कामकाज की दृष्टि से संगठन श्रेणी और जागरण श्रेणी में बांटा गया था। वहीं पिछला संगठनात्मक फेरबदल के तहत मार्च 2024 में केरल को दो प्रान्तों में विभाजित करने का निर्णय किया गया था।