
नई दिल्ली। देश के अधिकांश राज्यों में बढ़ते खर्च, कर्ज और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के कारण वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। अधिकांश राज्यों में बजट का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान जैसे तय खर्चों में जा रहा है। इससे विकास और पूंजीगत निवेश के लिए उपलब्ध संसाधन सीमित हो रहे हैं। नीति आयोग ने बुधवार को फिसकल हेल्थ इंडेक्स 2026 जारी की, जिसमें ओडिशा को देश का सबसे बेहतर वित्तीय स्थिति वाला राज्य रहा है। जबकि छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के प्रदर्शन को अच्छा बताया है, लेकिन राजस्थान समेत पांच राज्यों को प्रमुख 18 राज्यों की सूची में सबसे नीचे रखा गया है।
2023-24 को लेकर जारी की है। कई राज्यों का कर्ज- जीएसडीपी अनुपात बढ़ रहा है और उधारी का बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज चुकाने में खर्च हो रहा है। इससे वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है और भविष्य में राजकोषीय प्रभाव पड़ने की आशंका है। नीति आयोग ने राज्यों को कर संग्रह बढ़ाने, तय खर्चों को तर्कसंगत बनाने और पूंजीगत व्यय की गुणवत्ता सुधारने की सलाह दी है। मजबूत राजकोषीय प्रबंधन और संतुलित खर्च ही दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित कर सकता है। इस रिपोर्ट को आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी और मुख्य कार्यकारी अधिकारी निधि छिब्बर ने जारी किया। इस संस्करण में दायरा बढ़ाते हुए 18 प्रमुख राज्यों के साथ 10 पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों को भी शामिल किया गया है। हालांकि संरचनात्मक अंतर को देखते हुए इन राज्यों की रैंकिंग अलग श्रेणी में की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान की वित्तीय स्थिति पर दबाव बना हुआ है। राज्य में बढ़ता राजकोषीय घाटा, अधिक कर्ज और विकास कार्योंं के लिए सीमित वित्तीय गुंजाइश प्रमुख चुनौतियां बनी हुई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 2019-20 से 2023-24 के बीच राज्य का कुल खर्च करीब 39 फीसदी बढ़ा है और पूंजीगत व्यय में भी वृद्धि हुई है। हालांकि बजट का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान जैसे तय खर्चों में जाने से खर्च की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। 2023-24 में राजस्व प्राप्तियों का लगभग 62 प्रतिशत हिस्सा ऐसे ही खर्चों में चला गया। राजस्व के मोर्चे पर राज्य के अपने कर संग्रह में वृद्धि जरूर हुई है, लेकिन इसकी रफ्तार कई बड़े राज्यों से धीमी रही। साथ ही कुल उधारी का 87 फीसदी से अधिक हिस्सा पुराने कर्ज और ब्याज चुकाने में खर्च हो रहा है। वहीं कच्चे तेल की रॉयल्टी घटने से गैर-कर राजस्व में भी गिरावट आई है।
रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश की वित्तीय स्थिति में हाल के वर्षों में सुधार दिखाई दिया है। राज्य ने 2021-22 से लगातार राजस्व अधिशेष बनाए रखा है, जिसे मजबूत कर संग्रह और राजस्व बढ़ोतरी से समर्थन मिला है। 2023-24 में राज्य की राजस्व प्राप्तियां जीएसडीपी से अधिक तेजी से बढ़ीं। जीएसटी, उत्पाद शुल्क और व्यापार कर से आय में सुधार इसका प्रमुख कारण रहा। वहीं पूंजीगत व्यय पांच वर्षों में लगभग दोगुना होकर 56,539 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। हालांकि वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान बढऩे से तय खर्च भी बढ़े हैं, जो कुल राजस्व व्यय का करीब 43 फीसदी हो गए हैं। राज्य का कर्ज-से-जीएसडीपी अनुपात 29.17 फीसदी तक पहुंच गया है। रिपोर्ट के अनुसार घाटा तय सीमा में है, लेकिन कर्ज चुकाने को उधारी बढ़ती जा रही है।
छत्तीसगढ़ की वित्तीय स्थिति स्थिर है, हालांकि हाल के वर्षों में वित्तीय दबाव फिर से उभरने लगे हैं। हालांकि 2023-24 में राज्य के अपने संसाधनों का हिस्सा बढक़र लगभग 52 फीसदी पहुंच गया है। केंद्रीय करों और अनुदानों का संतुलित उपयोग करते हुए राज्य ने आर्थिक उतार-चढ़ाव के बावजूद वित्तीय स्थिरता बनाए रखने की कोशिश की है। प्रतिबद्ध खर्च (जैसे वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान) का हिस्सा बढऩे से सरकार के पास विकास या नए कार्यक्रमों के लिए लचीलापन कम हो रहा है। नई और विस्तारित योजनाओं के कारण राजस्व व्यय बढ़ा। इनमें कृषक उन्नति योजना, महतारी वंदन योजना, समग्र शिक्षा, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) और कृषि बिजली सब्सिडी शामिल हैं।
| प्रदेश | रैंक 2023-24 | रैंक 2022-23 |
| ओडिशा | 1 | 1 |
| गोवा | 2 | 3 |
| झारखंड | 3 | 4 |
| गुजरात | 4 | 5 |
| महाराष्ट्र | 5 | 6 |
| छत्तीसगढ़ | 6 | 2 |
| तेलंगाना | 7 | 8 |
| उत्तर प्रदेश | 8 | 7 |
| कर्नाटक | 9 | 10 |
| मध्य प्रदेश | 10 | 9 |
| हरियाणा | 11 | 14 |
| बिहार | 12 | 13 |
| तमिल नाडु | 13 | 11 |
| राजस्थान | 14 | 12 |
| केरल | 15 | 15 |
| प.बंगाल | 16 | 16 |
| आंध्र प्रदेश | 17 | 17 |
| पंजाब | 18 | 18 |
Updated on:
12 Mar 2026 12:42 pm
Published on:
12 Mar 2026 12:16 pm
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