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Himachal Politics: बीजेपी छोड़ने वाले राम लाल मार्कंडेय ने विधानसभा चुनाव से पहले नया दांव, तीसरा मोर्चा बनाने का किया ऐलान

Himachal 2027 elections: यह पहली बार नहीं है जब हिमाचल प्रदेश में तीसरा विकल्प बन रहा हो। इससे पहले भी तीसरे राजनीतिक विकल्प बनाने की कोशिशें हुई हैं, लेकिन वे ज्यादा सफल नहीं रहीं।

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शिमला

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Ashib Khan

Mar 12, 2026

राम लाल मार्कंडेय ने तीसरा मोर्चा बनाने का ऐलान किया (Photo-ANI)

Himachal Politics: हिमाचल प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बीजेपी छोड़ने वाले राम लाल मार्कंडेय ने तीसरा मोर्चा बनाने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि राज्य की जनता सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से नाखुश है, इसलिए एक नए राजनीतिक विकल्प की ज़रूरत महसूस की जा रही है।

अप्रैल में तीसरे मोर्चे का किया जाएगा ऐलान

मार्कंडेय ने आगे कहा कि कई राजनीतिक दलों के नेता और रिटायर्ड प्रशासनिक अधिकारी उनसे संपर्क में हैं और इस नए राजनीतिक मंच से जुड़ने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि अप्रैल में तीसरे मोर्चे की औपचारिक घोषणा की जाएगी।

दरअसल, मार्कंडेय पहले बीजेपी में थे। लेकिन 2024 के चुनाव में रवि ठाकुर को टिकट देने का उन्होंने विरोध किया था और पार्टी छोड़ दी थी। इसके बाद वे लाहौल-स्पीति सीट से निर्दलीय चुनाव लड़े थे। 

प्रदेश में तीसरा विकल्प रहा है फेल

यह पहली बार नहीं है जब हिमाचल प्रदेश में तीसरा विकल्प बन रहा हो। इससे पहले भी तीसरे राजनीतिक विकल्प बनाने की कोशिशें हुई हैं, लेकिन वे ज्यादा सफल नहीं रहीं। 1997 में सुख राम ने हिमाचल विकास कांग्रेस का गठन किया था। 1998 के विधानसभा चुनाव में इस पार्टी ने 5 सीटें जीतीं और प्रेम कुमार धूमल को मुख्यमंत्री बनने में समर्थन दिया।

इसके अलावा, हिमाचल लोक राज पार्टी और लोकहित पार्टी जैसे क्षेत्रीय प्रयोग भी हुए, लेकिन वे राज्य स्तर पर मजबूत राजनीतिक ताकत नहीं बन सके।

वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि हिमाचल की 68 सीटों वाली विधानसभा में अब तक कोई भी तीसरा मोर्चा कुछ सीटों से ज्यादा हासिल नहीं कर पाया है, क्योंकि कांग्रेस और भाजपा की बची पकड़ मजबूत रही है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि चुनाव से पहले नेताओं और फैसलों में असंतोष बढ़ने पर नए राजनीतिक मंच उभरते रहते हैं। ऐसे में यदि मार्कंडेय अलग-अलग पार्टियों के नेताओं और प्रभावशाली सेवानिवृत्त अधिकारियों को साथ लाने में सफल होते हैं, तो कुछ सीटों पर चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।