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पिता थे बीजेपी सांसद, बेटा बना विपक्ष की ढाल; जानें कांग्रेस से राज्य सभा पहुंचे अभिषेक मनु सिंघवी की कहानी

Congress candidate Abhishek Manu Singhvi: तेलंगाना से कांग्रेस प्रत्याशी अभिषेक मनु राज्य सभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।

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भारत

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Ashib Khan

Mar 11, 2026

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तेलंगाना से राज्य सभा सांसद पहुंचे अभिषेक मनु सिंघवी (Photo-IANS)

Rajya Sabha Elections 2026: राज्य सभा की 37 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं। इनमें से 26 सीटों के लिए निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। अब 11 सीटों के लिए 16 मार्च को वोटिंग होगी। राज्य सभा चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा तेलंगाना से कांग्रेस प्रत्याशी अभिषेक मनु सिंघवी को लेकर हो रही है।

BJP से राज्य सभा सांसद थे सिंघवी के पिता

अभिषेक मनु सिंघवी के पिता, लक्ष्मी मल्ल सिंघवी, देश के जाने-माने कानूनविद और बीजेपी के राज्य सभा सांसद थे। पिता के बीजेपी में होने के बाद भी अभिषेक मनु सिंघवी ने कांग्रेस का हाथ थामा। बताया जाता है कि राजनीति में अभिषेक मनु सिंघवी की माधवराव सिंधिया ने लॉन्चिंग कराई और सोनिया गांधी तक पहुंचाया।

विपक्ष के लिए क्यों जरूरी है अभिषेक सिंघवी?

कांग्रेस ही नहीं विपक्ष के अन्य दलों के लिए अभिषेक मनु सिंघवी जरूरी है। हर विपक्षी दल अपने तरफ से सिंघवी को राज्य सभा भेजना चाहता है। अरविंद केजरीवाल ने भी अभिषेक मनु सिंघवी को राज्य सभा सभा भेजने की कोशिश की थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। 

2024 में कांग्रेस हिमाचल प्रदेश से सिंघवी को राज्य सभा भेज रही थी, लेकिन उन्हें वहां से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद राहुल गांधी ने तेलंगाना से सिंघवी को राज्य सभा भेजा। इसके बाद अब तेलंगाना से कांग्रेस ने सिंघवी को राज्य सभा प्रत्याशी बनाया और सिंघवी निर्विरोध जीत गए हैं। 

विपक्ष की ढाल बने सिंघवी

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कई बार विपक्षी दलों की ढाल बने हैं। जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सांसद रहते सदस्यता चली गई हो, या फिर सीएम रहते अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी हो गई और हेमंत सोरेन के लिए सीएम बने रहना मुश्किल हो गया, तब विपक्ष के लिए संकटकाल का एकलौता इलाज अभिषेक मनु सिंघवी बने। 

AAP, कांग्रेस से लेकर टीएमसी के नेताओं के लिए अभिषेक मनु सिंघवी वकील ही नहीं, सुरक्षा कवच है। 

क्यों संकटमोचक हैं विपक्ष के सिंघवी?

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी विपक्षी नेताओं के संकटमोचक हैं। ऐसा उन्होंने कई बार साबित किया है। जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की सदस्यता चली गई थी और सरकारी बंगला भी छिन चुका था, इसके अलावा चुनाव लड़ने पर भी तलवार लटकी हुई थी, तब अभिषेक सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में ऐसी दलीलें दीं कि सजा पर रोक लग गई और राहुल गांधी की सांसदी बहाल की गई। विपक्ष के लिए सिंघवी का यह सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक था।

AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल जेल में थे। केजरीवाल उस समय दिल्ली के सीएम भी थे। सरकार संकट में थी। सुप्रीम कोर्ट में केजरीवाल के लिए अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें दीं। इसके बाद कोर्ट से केजरीवाल को राहत मिली। 

इतना ही नहीं, जेएमएम के नेता हेमंत सोरेन से लेकर TMC के दूसरे सबसे बड़े नेता अभिषेक बनर्जी के लिए भी सिंघवी ढाल बने। सिंघवी बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के भी सबसे भरोसेमंद वकील हैं। 

विवादों में भी रहे सिंघवी

अभिषेक मनु सिंघवी का विवादों से भी नाता रहा है। 2012 में एक कथित सीडी सामने आई, जिसके बाद अभिषेक मनु सिंघवी पर सवाल खड़े होना शुरू हो गया। फिर उन्होंने कांग्रेस प्रवक्ता और संसदीय समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि इसके बाद सिंघवी ने हार नहीं मानी और कानूनी लड़ाई लड़ी।