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ईरान युद्ध के बीच देश भर में सिलेंडर को लेकर मची मारा-मारी, रेस्तरां से लेकर ये चीजे हुई प्रभावित

देशभर में कमर्शियल LPG सिलेंडर की कमी से रेस्टोरेंट उद्योग प्रभावित हो रहा है। कई शहरों में मेनू सीमित किए जा रहे हैं और गैस बचाने के उपाय अपनाए जा रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है।

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भारत

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Himadri Joshi

Mar 11, 2026

Commercial LPG Cylinder supply effected

कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित (प्रतीकात्मक तस्वीर)

देशभर में कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई में अचानक आई रुकावट ने रेस्टोरेंट और होटल उद्योग के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। सरकार घरेलू गैस उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दे रही है, जिसके कारण कई शहरों में व्यावसायिक सिलेंडरों की डिलीवरी प्रभावित हो गई है। इस बीच कई रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि कमर्शियल गैस की कमी के कारण उन्हें मेनू सीमित करना पड़ रहा है और कुछ जगहों पर अस्थायी बंदी की आशंका भी पैदा हो गई है। सिलेंडर की सप्लाई में आई इस कमी को इजरायल, अमेरिका और ईरान में छिड़े युद्ध का प्रभाव बताया जा रहा है।

कमर्शियल LPG शॉर्टेज का रेस्टोरेंट पर असर

हिंदूस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक देश के कई बड़े शहरों जैसे मुंबई, बेंगलुरु और गुरुग्राम में होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को गैस की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार घरेलू गैस की सप्लाई को प्राथमिकता दे रही है, जिससे कमर्शियल सिलेंडरों की उपलब्धता घट गई है। हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय और तेल कंपनियों ने कहा है कि गैस का स्टॉक पर्याप्त है और घबराने की जरूरत नहीं है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए LPG उत्पादन लगभग 10 प्रतिशत बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

कई रेस्टोरेंट अपनाने लगे क्राइसिस मेनू

इसके बावजूद कई रेस्टोरेंट गैस बचाने के लिए “क्राइसिस मेनू” अपनाने लगे हैं। ऐसे मेनू में वे व्यंजन शामिल किए जा रहे हैं जिन्हें कम समय और कम गैस में पकाया जा सकता है। कई जगहों पर कोयला आधारित तंदूर का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है ताकि गैस पर निर्भरता कम हो सके।

बेंगलुरु में डोसा पर सबसे ज्यादा असर

गैस संकट का सबसे ज्यादा असर उन रेस्टोरेंट पर पड़ रहा है जहां लगातार तेज आंच की जरूरत होती है। बेंगलुरु के प्रसिद्ध भोजनालयों में डोसा जैसे व्यंजन बड़ी मात्रा में बनाए जाते हैं और इसके लिए लगातार जलती गैस बर्नर की आवश्यकता होती है। कुछ रेस्टोरेंट रोजाना 6 से 12 तक LPG सिलेंडर का उपयोग करते हैं। कई प्रतिष्ठानों को सामान्य सप्लाई से केवल 20 प्रतिशत ही सिलेंडर मिल रहे है। इससे रसोई संचालन मुश्किल हो गया है। कई जगह तवा की संख्या कम कर दी गई है ताकि गैस की खपत घटाई जा सके। कुछ रेस्टोरेंट इंडक्शन और इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों का प्रयोग भी कर रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि पारंपरिक तेज आंच जैसा परिणाम इनसे नहीं मिल पाता।

मेनू कटौती और ब्लैक मार्केट की समस्या

गैस की कमी के कारण कई रेस्टोरेंट मालिकों ने मेनू छोटा कर दिया है। कुछ जगहों पर ऐसे व्यंजन हटाए जा रहे हैं जिन्हें पकाने में ज्यादा गैस लगती है। उद्योग संगठनों ने भी अपने सदस्यों को गैस बचाने के लिए निर्देश जारी किए हैं। इनमें मेनू सीमित करना, कम गैस वाले व्यंजन प्राथमिकता देना और संचालन समय घटाने जैसे सुझाव शामिल हैं। दूसरी ओर, सिलेंडर की कमी ने ब्लैक मार्केट को भी बढ़ावा दिया है। जहां आधिकारिक कीमत करीब 1940 रुपये है, वहीं कुछ जगहों पर एक सिलेंडर 2800 से 3000 रुपये तक में बिक रहा है। छोटे रेस्टोरेंट के लिए यह स्थिति और कठिन हो गई है क्योंकि वे इतनी महंगी गैस खरीदने में सक्षम नहीं हैं।