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पश्चिम बंगाल में SIR पर विवादः सुप्रीम कोर्ट ने कहा- न्यायिक अधिकारियों की ईमानदारी पर..

Supreme Court on SIR: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद बढ़ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की ईमानदारी पर सवाल उठाने पर कड़ी नाराजगी जताई, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का विरोध प्रदर्शन जारी है।

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West Bengal SIR controversy: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की ईमानदारी पर सवाल उठाने की कोशिशों पर कड़ी नाराजगी जताई है। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि ऐसे आरोप 'बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे'।

अदालत ने कहा कि दावों पर फैसला करने वाले न्यायिक अधिकारियों पर अविश्वास जताने वाली याचिकाएं समय से पहले हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल करने का दावा खारिज होता है तो वह अपील कर सकता है। इसके लिए कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल को पुराने या मौजूदा न्यायाधीशों की विशेष अपीलीय पीठ गठित करने का अधिकार दिया गया है।

इस पूरी प्रक्रिया का खर्च चुनाव आयोग वहन करेगा। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आयोग अपीलीय व्यवस्था को लेकर औपचारिक अधिसूचना जारी करे। सुनवाई के दौरान बताया गया कि लाखों दावों और आपत्तियों पर सुनवाई जारी है और सैकड़ों न्यायिक अधिकारी दिन-रात काम कर रहे हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त का विरोध

कोलकाता दौरे पर आए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मंगलवार को दक्षिणेश्वर मंदिर पहुंचे, जहां बाहर प्रदर्शनकारियों ने काले झंडे दिखाकर ‘गो बैक’ के नारे लगाए। उन्होंने बाद में बेलूर मठ का दौरा कर कहा कि पश्चिम बंगाल रामकृष्ण-विवेकानंद की पवित्र भूमि है और आयोग हिंसा-मुक्त चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है। न्यू टाउन में भी संगठनों ने मतदाता सूची संशोधन में कथित अनियमितताओं और वैध मतदाताओं के नाम हटाने के आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया।

ममता का धरना जारी

इधर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एसआईआर के खिलाफ धरना पांचवें दिन भी जारी रहा। मेट्रो चैनल स्थित मंच पर उन्होंने बोर्ड पर ‘एसआईआर’ और ‘वैनिश्ड’ लिखकर प्रतीकात्मक चित्र बनाया। उनका आरोप है कि प्रक्रिया के जरिए वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं।