
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को दी सख्त चेतावनी (इमेज सोर : चैट GPT AI जनरेटेड इमेज)
Supreme Court Warning Mamata Government: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वे वोटर लिस्ट की जांच कर रहे कोर्ट द्वारा नियुक्त ज्यूडिशियल ऑफिसर पर शक न करें।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच ने स्पष्ट किया कि ये अधिकारी उन लोगों की अपीलें देख रहे थे जिनके नाम इलेक्टोरल रोल से हटा दिए गए थे। वे पहले से ही काफी ज्यादा काम कर रहे थे, इसलिए उनकी मेहनत और काम पर सवाल उठाना गलत है।
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट विवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कहा कि कोर्ट द्वारा नियुक्त ज्यूडिशियल अधिकारियों पर शक करने की हिम्मत भी मत करना।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सख्त लहजे में कहा कि ये अधिकारी पश्चिम बंगाल में हटाए गए वोटरों की अपीलों पर तय समय से ज्यादा काम कर रहे हैं और उनकी ईमानदारी पर सवाल उठाना बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आप उनसे और कितनी कुर्बानी चाहते हैं? सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी पूछा कि आखिर इन अधिकारियों पर शक करने वाली नई याचिका किसने दायर की है।
वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुईं राज्यसभा सांसद और सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी और टीएमसी सांसद वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी याचिका की जानकारी नहीं है। अंत में सुप्रीम कोर्ट ने SIR में हटाए गए नामों की अपील सुनने के लिए पूर्व हाई कोर्ट जजों की एक अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाने का आदेश दिया।
नए बनाए गए अपीलीय ट्रिब्यूनल में वे वोटर अपील कर सकेंगे, जिनकी आपत्तियां पहले न्यायिक अधिकारियों ने खारिज कर दी थीं। इस ट्रिब्यूनल में कितने सदस्य होंगे, यह फैसला कोलकाता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तय करेंगे।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने सवाल उठाया था कि अगर कोई न्यायिक अधिकारी किसी वोटर का दावा खारिज कर देता है, तो उसके पास आगे अपील करने का विकल्प ही नहीं बचता। इसी वजह से अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाने की मांग की गई थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि न्यायिक अधिकारियों के आदेशों के खिलाफ किसी भी प्रशासनिक या सरकारी मंच पर अपील करना संभव नहीं होगा। अपील केवल इसी नए ट्रिब्यूनल के जरिए ही की जा सकेगी।
Updated on:
10 Mar 2026 08:03 pm
Published on:
10 Mar 2026 08:03 pm
