
Supply Chain: ईरान-इजरायल जंग के चलते'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' बंद होने से शादियों और त्योहारों के सीजन में भारत में एलपीजी (LPG Crisis India) गैस का अभूतपूर्व संकट खड़ा हो गया है। घरेलू उपभोक्ताओं की रसोई की आग न बुझे, इसके लिए सरकार ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई में भारी कटौती (Gas Shortage) कर दी है। इस सख्त फैसले से पूरे देश के होटल-रेस्टोरेंट उद्योग (Hotel Industry Impact) में हाहाकार मच गया है। कॉमर्शियल गैस की किल्लत के कारण नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने चिंता जताई है कि लाखों लोगों का रोजगार खतरे में है। हाईवे के ढाबों और मैरिज गार्डन्स में खाना पकाने के लिए अब मजबूरी में लकड़ी या कोयले जैसे पारंपरिक ईंधनों का सहारा लिया जा रहा है।
दिल्ली (NCR): देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर (NCR) क्षेत्रों में भी गैस संकट का भारी असर देखने को मिल रहा है। पुरानी दिल्ली के मशहूर फूड स्टॉल्स से लेकर कनॉट प्लेस के हाई-एंड रेस्टोरेंट्स तक गैस की कमी से जूझ रहे हैं। सबसे ज्यादा बुरा हाल यहां के स्ट्रीट फूड वेंडर्स और छोटी टिफिन सर्विस चलाने वालों का है। कई जगहों पर कमर्शियल सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग की खबरें भी आ रही हैं, जिससे आम छोटे कारोबारियों के लिए अपना धंधा चालू रखना मुश्किल हो गया है।
चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ में भी गैस संकट गहरा गया है। यहां के विभिन्न सेक्टरों में चलने वाले फूड जॉइंट्स और यूनिवर्सिटी के आस-पास के ढाबों पर गैस की भारी किल्लत है। कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई रुकने से कई नामी रेस्टोरेंट्स ने अपना मेन्यू आधा कर दिया है, जिससे बाहर खाने वालों और पीजी में रहने वाले छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
चेन्नई: दक्षिण भारत के प्रमुख महानगर चेन्नई में भी गैस किल्लत से हाहाकार मचा हुआ है। यहां के मशहूर टी-स्टॉल्स, छोटे भोजनालयों और लोकप्रिय टिफिन सेंटर्स पर कमर्शियल गैस न मिलने से कामकाज ठप होने की कगार पर है। कई होटलों और रेस्टोरेंट्स ने इडली और डोसा जैसे ज्यादा गैस खपत वाले आइटम्स की जगह सीमित मेन्यू परोसना शुरू कर दिया है, जिससे आम जनता और पर्यटकों को खासी दिक्कत हो रही है।
देश में पैदा हुए अभूतपूर्व गैस संकट के बीच, अब ऑल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AILDF) और विभिन्न राज्यों के एलपीजी गैस डीलर्स एसोसिएशन ने भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। डीलरों का कहना है कि जमीनी हालात सरकारी दावों से कहीं ज्यादा खराब हैं और अगर जल्द ही कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो स्थिति पूरी तरह से बेकाबू हो सकती है।
एलपीजी डीलर्स एसोसिएशन ने देश भर के मौजूदा हालात को लेकर कई अहम बिंदु उठाए हैं, जो इस प्रकार हैं:
सप्लाई और डिमांड में भारी अंतर: डीलरों का कहना है कि पीछे (प्लांट्स और रिफाइनरियों) से ही गैस की सप्लाई 40% से 50% तक कम आ रही है। ऐसे में आम जनता की मांग को पूरा करना लगभग असंभव हो गया है।
गोदाम खाली, ग्राहकों का गुस्सा: गैस एजेंसियों के गोदाम खाली पड़े हैं। डिलीवरी बॉयज और एजेंसी कर्मचारियों को ग्राहकों के भारी गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर तो पुलिस सुरक्षा के बीच गैस बांटनी पड़ रही है।
ब्लैक मार्केटिंग और जमाखोरी का डर: हालांकि सरकार ने एस्मा (ESMA) लागू कर दिया है, लेकिन डीलर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि भारी किल्लत के कारण स्थानीय स्तर पर गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी का खतरा बहुत बढ़ गया है। लोग डर के मारे एडवांस बुकिंग कर रहे हैं, जिससे बैकलॉग और ज्यादा बढ़ गया है।
कॉमर्शियल सिलेंडरों की 'जीरो' सप्लाई: एसोसिएशन के मुताबिक, कई शहरों में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई लगभग शून्य कर दी गई है। इससे होटलों और रेस्टोरेंट्स का कामकाज तो ठप हुआ ही है, साथ ही उन डीलरों की कमाई पर भी भारी असर पड़ा है जिनका मुख्य व्यवसाय कामर्शियल गैस बेचना है।
परिवहन और लॉजिस्टिक्स की समस्या: ट्रकों और टैंकरों के मालिकों को भी स्पष्ट निर्देश न होने के कारण लॉजिस्टिक्स की समस्या पैदा हो गई है। कई जगह ट्रक प्लांट पर खड़े हैं, लेकिन उन्हें गैस भरने के लिए कई-कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है।
एलपीजी डीलर्स ने सरकार के सामने कुछ प्रमुख मांगें रखी हैं ताकि इस संकट से बेहतर तरीके से निपटा जा सके। डीलरों को सरकार और तेल कंपनियों (OMCs) की तरफ से स्पष्ट जानकारी दी जाए कि कब तक और कितनी गैस मिलेगी, ताकि वे ग्राहकों को सही स्थिति बता सकें। गैस एजेंसियों और गोदामों पर भीड़ बेकाबू न हो, इसके लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाए। जब तक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक एक पारदर्शी कोटा सिस्टम लागू किया जाए ताकि हर घर को कम से कम बुनियादी जरूरत के हिसाब से गैस मिल सके और वीआईपी कल्चर हावी न हो। गैस बुकिंग के सॉफ्टवेयर में बदलाव करके 'पैनिक बुकिंग' (तय समय से पहले बार-बार बुकिंग) को रोका जाए।
गैस संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने युद्ध स्तर पर कदम उठाए हैं:
आने वाले कुछ दिन देश के व्यापार और आम जनजीवन के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। इधर सरकार ने तेल कंपनियों को एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने का आदेश दे दिया है।
Published on:
10 Mar 2026 06:09 pm
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