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2029 से पहले लागू हो सकता है महिला आरक्षण! मोदी सरकार परिसीमन की शर्त हटाने पर कर रही विचार

संसद से तीन साल पहले पारित हुए महिला आरक्षण कानून में जनगणना व उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद नया आरक्षण लागू होने का प्रावधान है।

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भारत

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Anurag Animesh

Mar 11, 2026

Womens reservation could be implemented before 2029

Womens Reservation could be implemented before 2029

मोदी सरकार का विचार परवान चढ़ा तो देश में जल्दी ही नारी शक्ति की राजनीतिक जय-जय हो सकती है। पता चला है कि केंद्र सरकार महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33% आरक्षण देने वाले नारी शक्ति वंदन कानून को वर्ष 2029 के आम चुनाव (या उससे पहले ही) लागू करने की दिशा में नई रणनीति पर विचार कर रही है। सरकार आरक्षण संबंधी कानून को प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया से अलग करने की संभावना तलाश रही है। इसके लिए विपक्षी दलों से उच्चस्तर पर चर्चा की जा रही है जो पहले ही महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग करते रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि आम सहमति बनने पर सरकार संसद के मौजूदा सत्र में ही संविधान संशोधन विधेयक ला सकती है।

'परिसीमन के बाद' के पेच को हटाया जाएगा


इस संशोधन विधेयक में महिला आरक्षण कानून लागू होने में 'परिसीमन के बाद' के पेच को हटाया जाएगा। दरअसल, 27 साल से लंबित महिला आरक्षण विधेयक को मोदी सरकार ने सितंबर 2023 में संसद के विशेष सत्र में पारित कराकर इतिहास रचा था और लोकसभा व विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण की व्यवस्था की गई थी। इस कानून को लागू करने के लिए नई जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन की शर्त जोड़ी गई थी जिसे संशोधन कर हटाया जाएगा।

परिसीमन दूर, 10 साल नहीं टालना चाहती सरकार


संसद से तीन साल पहले पारित हुए महिला आरक्षण कानून में जनगणना व उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद नया आरक्षण लागू होने का प्रावधान है। देश में पांच साल से टल रही जनगणना प्रक्रिया अब शुरू होने वाली है, जो दो चरणों में पूरी होगी। जनगणना की प्रक्रिया 1 मार्च 2027 तक पूरी होने की उम्मीद है और उसके बाद इसके परिणाम प्रकाशित किए जाएंगे। जनगणना पूरी होने के बाद परिसीमन आयोग का गठन होगा। आमतौर पर परिसीमन की पेचीदा प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम दो से तीन साल का समय लग सकता है। ऐसे में 2029 के लोकसभा चुनाव तक परिसीमन पूरा होना मुश्किल माना जा रहा है और मौजूदा प्रावधानों के अनुसार परिसीमन के बिना महिला आरक्षण लागू नहीं होगा। ऐसे में कानून लाने के बावजूद वास्तव में महिला आरक्षण करीब 10 साल टल जाएगा। सूत्रों के अनुसार मोदी सरकार का मानना है कि परिसीमन से आरक्षण को अलग कर इसे जल्द लागू किया जाए।

सरकार करेगी चर्चा, विपक्ष की मांग होगी पूरी


महिला आरक्षण विधेयक संसद से पारित होने के समय से ही कांग्रेस समेत विपक्ष ने इसे परिसीमन से जोड़ने का विरोध कर तत्काल लागू करने की मांग की थी। कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने इसके लिए सरकार को पत्र भी लिखा था और सुप्रीम कोर्ट में भी विभिन्न याचिकाएं दायर कर आरक्षण जल्द लागू करने की मांग की गई। सूत्रों ने बताया कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू कानून में संशोधन के लिए विपक्ष के नेताओं से बात कर रहे हैं। विपक्ष की इस प्रस्ताव पर सहमति मुश्किल नहीं है, ऐसे में संसद के इसी सत्र में विधेयक आए तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।

लॉटरी से सीटें होंगी तय


यदि सरकार यह संशोधन लाने में सफल रहती है तो 2029 के लोकसभा चुनाव और उसके साथ होने वाले विधानसभा चुनावों में पहली बार लाॅटरी के जरिये एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। इससे भारतीय राजनीति में महिला प्रतिनिधित्व का नया अध्याय शुरू हो सकता है।

ऐसे बढ़ेगा महिलाओं का प्रभुत्व


लोकसभा (18वीं)- कुल सांसद - 543

महिला सांसद - 74 (14%)
आरक्षण लागू हुआ तो - 179 (33%)

विधानसभाएं

देशभर में कुल विधायक- 4,123
मौजूदा महिला विधायक- 390 (9%)

आरक्षण लागू हुआ तो - 1360 (33%)