
नई दिल्ली। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के बीच गठबंधन की घोषणा जल्दी हो सकती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब में अगली सरकार एनडीए की बनने के बयान के बाद दोनों दलों के साथ आने की चर्चाओं को बल मिला है। उधर अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने भी समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन के लिए तैयार होने की बात कही है। हालांकि, दोनों दलों ने अब तक गठबंधन की औपचारिक घोषणा नहीं की है।
सूत्रों के अनुसार दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत लगभग अन्तिम दौर में पहुंच गई है। भाजपा और अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन में सीटों का बंटवारा सबसे अहम मुद्दा है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा 40 से 47 सीटों पर दावा कर रही है, जबकि 36-37 सीटों पर सहमति बनने की संभावना जताई जा रही है। भाजपा पहले अकाली दल के साथ गठबंधन में 23 सीटों पर चुनाव लड़ती थी। अब पार्टी राज्य में अपना आधार बढ़ाने और अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। हालांकि अकाली दल शुरू में पिछले फार्मुले पर भी टिका था लेकिन भाजपा ने पिछले चुनाव और लोकसभा चुनाव के वोट मैट्रिक के हिसाब से अपनी दावेदारी जताई है।
पंजाब में चुनावी तैयारियों को लेकर भाजपा ने संगठनात्मक स्तर पर काम तेज किया है। केंद्रीय मंत्री सीआर पाटील की भूमिका भी इन तैयारियों में अहम बताई जा रही है। पार्टी राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर संगठन मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में गठबंधन होने पर सीटों की संख्या और चुनावी क्षेत्रों के चयन को लेकर बातचीत महत्वपूर्ण होगी। वहीं संगठन की ओर से महामंत्री सतीश पूनिया कमान संभाले हुए हैं। पाटील पंजाब को लेकर हुई कुछ बैठकों में शामिल रहे हैं।
भाजपा और अकाली दल लंबे समय तक पंजाब में सहयोगी रहे थे। सितंबर 2020 में कृषि कानूनों के विरोध के बीच अकाली दल ने एनडीए से नाता तोड़ लिया था। इसके बाद दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ते रहे। अब 2027 के चुनाव से पहले गठबंधन की संभावनाओं पर फिर चर्चा है। सुखबीर बादल ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना खारिज करते हुए समान विचारधारा वाले दलों के लिए दरवाजे खुले होने की बात कही है। हालांकि, सीटों के बंटवारे और साझा चुनावी रणनीति पर अंतिम सहमति के बाद ही गठबंधन की तस्वीर स्पष्ट होगी।