UPSC student phone explodes: दिल्ली में UPSC परीक्षा से ठीक पहले Realme फोन फटने से अभ्यर्थी घायल, साल भर की मेहनत हुई बर्बाद। उपभोक्ता कोर्ट ने रियलमी कंपनी को दोषी मानते हुए छात्र को 1.50 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
Delhi News: दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में रहने वाले एक UPSC अभ्यर्थी के लिए मोबाइल फोन का फटना न केवल शारीरिक जख्म दे गया, बल्कि उसके सुनहरे भविष्य और साल भर की कड़ी मेहनत पर भी पानी फेर दिया। इस गंभीर मामले पर सुनवाई करते हुए मध्य जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मोबाइल कंपनी 'रियलमी' (Realme) को सेवा में भारी कमी और लापरवाही का दोषी पाया है।
पीड़ित छात्र कोटी साईं पवन ने साल 2019 में करीब 18 हजार रुपये में Realme XT मोबाइल खरीदा था। 5 जून 2022 को पवन की UPSC प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) थी। पूरी रात रिवीजन करने के बाद पवन ने फोन पास में रखा ही था कि 4 जून की तड़के 3 बजे फोन में जोरदार धमाका हुआ और उसमें आग लग गई।
धमाका इतना भीषण था कि छात्र के माथे, हाथ और उंगलियों पर गंभीर चोटें आईं। उसे तत्काल अस्पताल ले जाना पड़ा, जिसके कारण वह अगले दिन होने वाली देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में शामिल नहीं हो सका। कोर्ट में अपनी व्यथा सुनाते हुए पवन ने कहा कि मेरे पिता ने जीवन भर की जमा-पूंजी मेरी कोचिंग की फीस में लगा दी थी। फोन फटने से न सिर्फ मेरा शरीर झुलसा, बल्कि मेरे करियर की रफ्तार भी एक साल पीछे छूट गई।
हैरानी की बात यह रही कि जब पीड़ित शिकायत लेकर सर्विस सेंटर पहुंचा, तो कंपनी ने मदद के बजाय उसे ही फंसाने की कोशिश की। कंपनी ने पवन से एक ऐसे बॉन्ड पर हस्ताक्षर कराने की कोशिश की जिसमें धमाके की जिम्मेदारी खुद छात्र की बताई गई थी। मना करने पर उसे अपमानित किया गया और उसका फोन तक वापस नहीं किया गया।
आयोग के अध्यक्ष दिव्य ज्योति जयपुरियार और सदस्य डॉ. रश्मि बंसल की पीठ ने कंपनी के रवैये पर सख्त नाराजगी जाहिर की। आयोग ने कहा कि मोबाइल बैटरी में विस्फोट सुरक्षा की दृष्टि से एक अत्यंत गंभीर मुद्दा है, जिससे जान भी जा सकती थी।
कोर्ट ने ‘रियलमी’ को सख्त निर्देश देते हुए पीड़ित को मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसके तहत कंपनी को शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना के लिए 1,00,000 रुपये, हर्जाने के तौर पर 25,000 रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 25,000 रुपये का भुगतान करना होगा। इसके अलावा, कोर्ट ने पूरी राशि पर 1 अक्टूबर 2022 से 6% सालाना ब्याज देने का भी निर्देश दिया है, ताकि पीड़ित को देरी का उचित मुआवजा मिल सके। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कंपनी 30 दिनों के भीतर इस पूरी राशि का भुगतान नहीं करती है, तो ब्याज दर बढ़ाकर 9 प्रतिशत सालाना कर दी जाएगी, जिससे देरी होने पर कंपनी पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।