
नई दिल्ली। भारत अब केवल सॉफ्टवेयर सेवा देने वाला देश नहीं रहना चाहता, बल्कि तकनीकी उत्पाद बनाने वाला राष्ट्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। इसी बदलाव की मजबूत मिसाल है वर्वेसमी माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक्स, जिसने सरकार की डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) योजना के समर्थन से सेमीकंडक्टर चिप डिज़ाइन के क्षेत्र में करीब 10 मिलियन डॉलर का निवेश जुटाया है।
दरअसल, सेमीकंडक्टर उद्योग में चिप डिज़ाइन सबसे अहम कड़ी मानी जाती है। यही तय करता है कि कोई इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद कितना तेज़, सुरक्षित और सक्षम होगा। कुल मूल्य संवर्धन का बड़ा हिस्सा डिज़ाइन से आता है और किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद की लागत में इसका योगदान 15 से 35 फीसदी तक होता है। यही कारण है कि भारत सरकार ने सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के तहत डीएलआई योजना शुरू की, ताकि घरेलू स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम चिप डिज़ाइन में आगे बढ़ सकें। अब तक 24 परियोजनाओं को स्वीकृति मिल चुकी है। इसमें वर्वेसमी माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक्स डीएलआई योजना के तहत स्वीकृत पहली कंपनी थी। इसे ‘चिप्स टू स्टार्टअप’ कार्यक्रम से भी समर्थन मिला। यह कंपनी अंतरिक्ष, रक्षा, औद्योगिक और स्मार्ट ऊर्जा क्षेत्रों के लिए चिप विकसित कर रही है।
-अंतरिक्ष और एवियोनिक्स के लिए डेटा अधिग्रहण चिप
-पंखों, सौर उपकरणों और इन्वर्टर के लिए बीएलडीसी मोटर नियंत्रक चिप
-ड्रोन और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सटीक मोटर नियंत्रण चिप
-ऊर्जा मीटर के लिए विशेष चिप
-वजन मशीन और स्पर्श आधारित उपकरणों के लिए अनुप्रयोग चिप
इंडिया एआइ इम्पैक्ट समिट 2026 के तीसरे दिन 10 पैवेलियन में फैला विशाल एक्सपो मुख्य आकर्षण का केंद्र बिंदु बना रहा। इस प्रदर्शनी में उद्योग जगत के लीडर्स, स्टार्टअप्स, शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी प्रतिनिधियों और आम नागरिकों की भारी भागीदारी देखी गई। खराब मौसम के बावजूद, बड़ी संख्या में युवा और छात्र प्रदर्शनी स्थल पर उमड़े। उन्होंने अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स और प्रौद्योगिकियों के लाइव प्रदर्शन को प्रत्यक्ष रूप से देखा और भविष्य की तकनीक के साथ रूबरू हुए। एक्सपो में चर्चा का मुख्य केंद्र बिंदु एआइ संचालित साइबर सुरक्षा और फिनटेक समाधान रहे, जिन्हें उभरते खतरों के विरुद्ध डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। प्रदर्शकों ने अत्याधुनिक मैनेज्ड डिटेक्शन एंड रिस्पांस (एमडीआर) प्लेटफॉर्म, एआइ-आधारित थ्रेट इंटेलिजेंस सिस्टम और डिजिटल कॉमर्स के अगले चरण के लिए प्रिवेंशन-फस्र्ट सुरक्षा ढांचे का प्रदर्शन किया।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रमुख उद्योगपतियों, वैश्विक शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों के एक रणनीतिक सम्मेलन की अध्यक्षता की। इसमें विशेष रूप से विनिर्माण इंजीनियरिंग प्रौद्योगिकी (एमईटी) इकोसिस्टम के लिए भारत की एआइ प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए इसे अपनाने, कौशल विकास और समावेशी विकास पर विशेष ध्यान दिया गया। इंडिया एआइ इम्पैक्ट समिट 2026 में यह बैठक इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी (एमईआईटीवाई) के नेतृत्व में नैमटैक की ओर से क्यूरेट की गई थी। इसमें मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मद्रास (आईआईटी-एम) और अन्य जाने-माने विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक समुदाय के साथ-साथ माइक्रोसॉफ्ट इंडिया, डेल टेक्नोलॉजीज़, सिस्को इंडिया, हिताची इंडिया, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, रॉकवेल ऑटोमेशन, पालो ऑल्टो नेटवर्क्स, पेपाल, और इंटेल जैसी इंडस्ट्रीज़ के सी-सूट अधिकारी भी शामिल हुए। उद्योग-शैक्षणिक समुदाय-सरकार की चर्चा में एआइ को भारत के औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन, प्रतिस्पर्धात्मकता और नवोन्मेष के एक बुनियादी प्रवर्तक के तौर पर उजागर किया गया। मंत्री वैष्णव ने एआइ फॉर मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी पर श्वेतपत्र संकल्पना जारी की।
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) बोस्टन, अमेरिका के एकेडमिक एडवांसमेंट के चांसलर, प्रोफेसर एरिक ग्रिमसन ने कहा कि भारत की एआइ यात्रा का अगला चरण इसकी क्षमता से एप्लिकेशन तक जाने की क्षमता से तय होगा। इंडस्ट्री, एंटरप्राइजेज और एमएसएमई में एआइ को शामिल करना, बड़े पैमाने पर कौशल में निवेश करना, और यह सुनिश्चित करना कि नवोन्मेष सबको साथ लेकर चले। इसके लिए शैक्षणिक समुदाय और उद्योग तथा सरकार के बीच लगातार सहयोग की ज़रूरत है ताकि ऐसी व्यवस्था बनाई जा सके जो अनुसंधान और टेक्नोलॉजी को वास्तविक दुनिया के नतीजों में बदल सके। माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के कार्यकारी निदेशक प्रवीण पंचाग्नुला ने कहा कि भारत के औद्योगिक क्षेत्र में एआइ का असर शॉप फ्लोर और कॉम्प्लेक्स इंजीनियरिंग सिस्टम में इसकी तैनाती से तय होगा। सिस्को इंडिया के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के निदेशक विनोद करुममपोयिल ने कहा कि एआइ को जि़म्मेदारी से और बड़े पैमाने पर तैनात करने के लिए प्रतिभा तैयार करने पर जोर होना चाहिए।
पालो ऑल्टो नेटवर्क्स की एमडी और वाइस प्रेसिडेंट इंडिया और सार्क स्वप्ना बापट ने कहा कि साइबर सुरक्षा और आइटी के माहौल में, खराब तरीके से डिज़ाइन की गई ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी (ओटी) एक बड़ा खतरा पैदा करती है। हमारा लक्ष्य शिक्षा और उद्योग के बीच की खाई को कम करना है, स्कूलों में मॉडर्न नेटवर्क सिक्योरिटी प्रिंसिपल्स लाना है।