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फ्रांस के राष्ट्रपति ने लगाया ‘जय हो’ का नारा, एआई समिट में बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन की उठाई मांग

India AI Impact Summit 2026: नई दिल्ली में आयोजित होने वाली एआई समिट में फ्रांस और भारत के बीच एक बार फिर मजबूत रिश्ते देखने को मिले। इमैनुएल मैक्रों ने अपने संबोधन में क्या कुछ कहा, चलिए जानते हैं।

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India AI Impact Summit 2026

India AI Impact Summit 2026 (सोर्स-एक्स)

India AI Impact Summit 2026: नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट सम्मेलन 2026 उस समय खास बन गया, जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने भाषण का समापन ‘जय हो’ के नारे के साथ किया। उनके इस अंदाज ने न सिर्फ सभागार में मौजूद प्रतिनिधियों का दिल जीता, बल्कि भारत-फ्रांस साझेदारी को भी एक नया संदेश दिया।

डिजिटल भारत की तारीफ से की शुरुआत (India AI Impact Summit 2026)

समिट में पहुंचते ही मैक्रों ने भारतीय परंपरा के अनुरूप ‘नमस्ते’ कहकर अपने संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह मंच सिर्फ तकनीक पर चर्चा का अवसर नहीं, बल्कि मानवता के भविष्य को दिशा देने का प्रयास है।

उन्होंने भारत की डिजिटल क्रांति का उदाहरण देते हुए बताया कि एक दशक पहले जहां छोटे कारोबारियों के लिए बैंकिंग सुविधाएं मुश्किल थीं, वहीं आज वही लोग मोबाइल के जरिए तत्काल भुगतान स्वीकार कर रहे हैं। मैक्रों ने भारत की डिजिटल पहचान प्रणाली और तेज़ी से बढ़ते डिजिटल लेन-देन की सराहना करते हुए इसे दुनिया के लिए मॉडल बताया।

बच्चों की सुरक्षा पर सख्त रुख

हालांकि, उनके भाषण का सबसे अहम हिस्सा बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़ा रहा। मैक्रों ने स्पष्ट कहा कि जो चीजें वास्तविक दुनिया में बच्चों के लिए प्रतिबंधित हैं, उन्हें इंटरनेट पर भी उपलब्ध नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि फ्रांस में 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

मैक्रों ने उम्मीद जताई कि भारत भी इस पहल पर विचार करेगा। उनका मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, सरकार और नियामक संस्थाओं की साझा जिम्मेदारी है कि वे बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल माहौल तैयार करें।

यूरोपीय देशों का समर्थन

फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि ग्रीस और स्पेन सहित कई यूरोपीय देश बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए समान कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल नियमों का सवाल नहीं, बल्कि सभ्यता और नैतिक जिम्मेदारी का विषय है।

एआई और वैश्विक प्रतिस्पर्धा

समिट के दौरान मैक्रों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख क्षेत्र बताया। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले वर्ष पेरिस में आयोजित एआई एक्शन समिट में भारत और फ्रांस ने मिलकर जिम्मेदार तकनीकी विकास के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत तय किए थे।

उनके मुताबिक, एआई स्वास्थ्य, ऊर्जा, परिवहन, कृषि और सार्वजनिक सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। लेकिन इसके साथ ही यह जरूरी है कि तकनीक का विकास मानवीय मूल्यों और सामाजिक संतुलन के साथ हो।

भारत-फ्रांस साझेदारी को नया आयाम

मैक्रों के संबोधन ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत और फ्रांस के बीच तकनीकी सहयोग सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साझा मूल्यों और भविष्य की जिम्मेदारियों पर आधारित है। ‘जय हो’ के नारे के साथ समाप्त हुआ उनका भाषण इस साझेदारी की मजबूती और आपसी सम्मान का प्रतीक बन गया।