
CJP alleges Police Brutality: संसद का मानसून सत्र शुरू होते ही देश की राजधानी दिल्ली की सड़कें राजनीतिक अखाड़ा और रणक्षेत्र में बदल गईं। लद्दाख की स्वायत्तता और पर्यावरण की रक्षा के लिए महीनों से आंदोलन कर रहे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के समर्थकों के 'संसद मार्च' को रोकने के लिए पुलिस ने जो रुख अपनाया, उसने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। जंतर-मंतर पर शुरू हुआ शांतिपूर्ण प्रदर्शन देखते ही देखते चीख-पुकार में बदल गया, जहां प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी झड़प देखने को मिली।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दिल्ली पुलिस पर बर्बरता का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि पुलिस ने मार्च का नेतृत्व कर रहीं सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो के साथ न सिर्फ बदसलूकी की, बल्कि उनके बाल भी खींचे। आरोप यहीं खत्म नहीं होते; इस झड़प में एक 12 साल की मासूम बच्ची का सिर फट गया है, जबकि 40 से 50 अन्य प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
दूसरी ओर, आरोपों के घेरे में आई दिल्ली पुलिस ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि स्थिति को पूरी तरह 'पेशेवर' तरीके से संभाला जा रहा है और किसी भी तरह के लाठीचार्ज या हिरासत में लेने की खबरें महज अफवाह हैं। पुलिस ने एक्स (ट्विटर) पर बयान जारी कर जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो पुलिस के इन दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं, जिसमें प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग और लाठीचार्ज साफ देखा जा सकता है। इस झड़प में कुछ पुलिसकर्मियों के भी घायल होने की खबर है।
सड़क पर उतरे आंदोलनकारी भारी बैरिकेडिंग, आंसू गैस के गोलों और लाठियों के बावजूद पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे आंदोलन खत्म नहीं करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की और उनके इस्तीफे की मांग उठाई। इस प्रदर्शन के कारण लुटियंस दिल्ली और सेंट्रल दिल्ली के कई इलाकों में घंटों तक चक्काजाम जैसी स्थिति बनी रही, जिससे आम राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
संसद सत्र के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (जो पहले CrPC की धारा 144 थी) लागू कर दी है। इसके तहत बिना अनुमति के 5 या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने, रैलियों और मार्च निकालने पर पूरी तरह पाबंदी है। संसद भवन और अन्य संवेदनशील सरकारी इमारतों की सुरक्षा के लिए चप्पे-चप्पे पर भारी सुरक्षाबल और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान तैनात कर दिए गए हैं।
यह विवाद नया नहीं है। सोनम वांगचुक और लद्दाख के लोग पिछले लंबे समय से केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करना: लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग की जा रही है, ताकि वहां की जनजातीय आबादी, संस्कृति और जमीन को विशेष संवैधानिक संरक्षण मिल सके।
पूर्ण राज्य का दर्जा: साल 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग होकर केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से ही लद्दाख के लोग पूर्ण राज्य के दर्जे और अपने लिए अलग विधानसभा की मांग कर रहे हैं।
पर्यावरण का संरक्षण: हिमालयी क्षेत्र के नाजुक पर्यावरण को बड़े कॉर्पोरेट्स और खनन माफियाओं से बचाने के लिए स्थानीय लोग सख्त कानून चाहते हैं।
इससे पहले भी सोनम वांगचुक ने लेह में कई दिनों तक भूख हड़ताल (जलवायु उपवास) की थी, जिसे देशभर से भारी समर्थन मिला था। अब यह लड़ाई दिल्ली की दहलीज तक आ पहुंची है, जिसने मानसून सत्र के पहले ही दिन सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।