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SIR पर चुनाव आयोग के खिलाफ गरजे पप्पू यादव, बोले- इस धरती पर EC से बड़ा दुष्ट कोई नहीं, पीएम मोदी- अमित शाह भी नहीं बचा पाएंगे

Pappu Yadav on SIR: पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन को लेकर चुनाव आयोग पर हमला बोला है। आयोग को दुष्ट बताते हुए उन्होंने कहा कि उसे जवाबदेह ठहराया जाएगा और न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उसे बचा पाएंगे।
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पूर्णिया सांसद पप्पू यादव (फोटो- Pappu yadav FB)

Pappu Yadav on Election Commission: वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के दौरान वोटरों के नाम हटाए जाने को लेकर पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पप्पू यादव ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उसे 'दुष्ट' बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश भर में 8 से 9 करोड़ से ज्यादा वोटरों के नाम लिस्ट से सोची-समझी साज़िश के तहत हटा दिए गए हैं और इस मनमानी का हिसाब कभी न कभी जरूर होगा।

धरती पर चुनाव आयोग से बड़ा दुष्ट कोई नहीं : पप्पू यादव

चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए पप्पू यादव ने कहा कि आयोग पूरी तरह से दुष्ट हो चुका है और इस धरती पर इससे बड़ी कोई दुष्ट आत्मा पैदा नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि कभी न कभी आयोग को इस मनमानी का जवाब देना ही होगा और उस समय न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न ही गृह मंत्री अमित शाह उसे बचा पाएंगे।

सांसद पप्पू यादव ने दावा किया कि देश भर में 8 से 9 करोड़ से ज्यादा वोटरों के नाम गैर-कानूनी तरीके से हटा दिए गए हैं और अब हर कोई मानता है कि यह पूरी तरह से गलत था। आम आदमी पार्टी के संयोजक का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि हालात इतने खराब हैं कि अरविंद केजरीवाल के पूरे परिवार का नाम भी वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था।

बिहार बाढ़ पर सरकार को घेरा

बिहार में बाढ़ का जिक्र करते हुए सांसद पप्पू यादव ने बताया कि राज्य में 56 लाख से अधिक लोग बाढ़ का सामना कर रहे हैं और बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, फिर भी केंद्रीय नेतृत्व ने इस त्रासदी के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा या कोई ट्वीट तक नहीं किया।

उन्होंने कहा कि जिन्हें पड़ोसी देश नेपाल की चिंता रहती है, लेकिन बिहार के बदहाल लोगों की सुध नहीं आती, उनका यह रवैया असली राष्ट्रविरोधी मानसिकता को दर्शाता है। अपने अधिकारों और हक के लिए लड़ना किसी भी तरह से देश के खिलाफ काम नहीं है।