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Dattatreya Hosabale: ‘जाति के नाम पर भेदभाव हिंदू समाज पर कलंक’, बोले RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबाले

RSS General Secretary: भोपाल में RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि जन्म के आधार पर भेदभाव हिंदू संस्कृति का हिस्सा नहीं है। उन्होंने जातिगत भेदभाव को खत्म करने और समाज को एकजुट करने पर जोर दिया।
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भारत

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Anurag Animesh

Sep 20, 2026

rss general secretary Dattatreya Hosabale

दत्तात्रेय होसबाले(फोटो-ANI)

RSS: भोपाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने जाति आधारित भेदभाव और सामाजिक विभाजन को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जन्म के आधार पर भेदभाव हिंदू संस्कृति का हिस्सा नहीं है और जाति के नाम पर होने वाले भेदभाव से समाज कमजोर होता है। होसबाले ने कहा कि सभी लोग भारत माता की संतान हैं और सभी ईश्वर की संतान हैं। इसलिए इंसानों के बीच किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जाति के नाम पर समाज में होने वाले गलत व्यवहार से समाज की ताकत कम होती है और उसे भीतर से कमजोर करता है।

‘जाति का भेदभाव हिंदू समाज पर कलंक’


RSS महासचिव ने कहा कि जाति के आधार पर भेदभाव को खत्म करने की शुरुआत कानून या केवल उपदेशों से नहीं होगी। इसके लिए लोगों को अपने व्यवहार, जीवन और घर से बदलाव की शुरुआत करनी होगी। उन्होंने कहा कि समाज के लिए निस्वार्थ भाव से काम करने वाले लोगों को संकल्प लेना चाहिए कि वे जाति के आधार पर किसी से भेदभाव नहीं करेंगे। उनके मुताबिक, यह हिंदू समाज पर लगा एक कलंक है और समाज को इससे मुक्त होने की जरूरत है। होसबाले ने कहा कि यह बदलाव केवल कानून बनाने, किसी महापुरुष के आने या किसी के उपदेश देने से नहीं होगा। लोगों के अपने आचरण में बदलाव से ही सामाजिक भेदभाव खत्म किया जा सकता है।

‘जाति, भाषा और क्षेत्र के नाम पर विभाजन से कमजोर होती है एकता’


दत्तात्रेय होसबाले ने समाज में जाति, संप्रदाय, भाषा और क्षेत्र के आधार पर बनने वाले विभाजन पर भी बात की। उन्होंने कहा कि यदि समाज को एकजुट करना है तो अंदर के भेदभाव को पीछे छोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि लोग खुद को किसी जाति, संप्रदाय या भाषा से जोड़कर अलग मानने लगते हैं। इसी तरह उत्तर भारत और दक्षिण भारत के नाम पर भी अलगाव की भावना पैदा होती है। उनके अनुसार, इस तरह का भेदभाव लोगों को एक-दूसरे से दूर करता है।

उन्होंने संगठन की ताकत समझाने के लिए मुट्ठी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग उंगलियों में ताकत होती है, लेकिन जब वे एक साथ आती हैं तो मुट्ठी की ताकत बढ़ जाती है। उनके अनुसार, यही संगठन की शक्ति है।

शाखा में व्यक्ति निर्माण और समाज को जोड़ने पर जोर-होसबाले


होसबाले ने कहा कि RSS की शाखा का काम व्यक्ति के चरित्र निर्माण के साथ समाज में संगठन की भावना पैदा करना है। उन्होंने कहा कि समाज को जोड़ने और व्यक्ति के भीतर चरित्र निर्माण के जरिए राष्ट्रीय जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ने की कोशिश की जा सकती है। उन्होंने स्वयंसेवकों से इस काम को निस्वार्थ भाव, ईमानदारी और पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाने की बात कही। भोपाल में RSS के शताब्दी वर्ष के तहत 20 सितंबर को लाल परेड ग्राउंड में बड़ा स्वयंसेवक एकत्रीकरण आयोजित किया गया, जिसमें भोपाल विभाग के पांच जिलों से करीब 30 हजार स्वयंसेवकों के शामिल होने की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में दत्तात्रेय होसबाले मुख्य वक्ता के तौर पर मौजूद रहे।