नई दिल्ली

पश्चिम बंगालः भाजपा चल रही माइक्रो मैनेजमेंट का दांव

हरियाणा-दिल्ली फार्मूले पर 'अभी नहीं तो कभी नहीं 'की लड़ाई

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BJP lose Tarapur Gram Panchayat by-election (फोटो- Patrika.com)

नई दिल्ली। कलिंग और अंग के बाद अब बंग यानी पश्चिम बंगाल पर भाजपा का पूरा फोकस है। ओडिशा (कलिंग) में सत्ता और बिहार (अंग) में एनडीए की बड़ी जीते के बाद भाजपा पश्चि बंगाल में भी हरियाणा- दिल्ली का माइक्रो मैनेजमेंट फार्मूला लागू करने जा रही है। अप्रेल में संभावित विधानसभा चुनावों को भाजपा 'अभी नहीं तो कभी नहीं ' के संकल्प के साथ लड़ने की तैयारी में है। इसके तहत बूथ से लेकर राज्य स्तर तक संगठनात्मक निगरानी, बाहरी प्रभारियों की तैनाती और जीत की संभावना वाले उम्मीदवारों को टिकट देने की रणनीति अपनाई जा रही है। पार्टी का लक्ष्य तृणमूल कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगा कर सत्ता की राह बनाना है।

जिताऊ रणनीति और प्रभारियों की तैनाती

भाजपा ने पूरे पश्चिम बंगाल को छह बड़े अंचलों में बांट कर माइक्रो मैनेजमेंट प्लान तैयार किया है। इन अंचलों की जिम्मेदारी चुनाव प्रबंधन में माहिर, राज्य से बाहर के नेताओं को सौंपी गई है। प्रभारी सभी दलों की गतिविधियों, अंतुष्ट पदाधिकारियों और संभावित दल-बदल पर नजर रखेंगे। पार्टी अंतिम समय तक विकल्प खुले रख कर टिकट देने की तैयारी में है। 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 77 सीटों पर जीत हासिल कर 38.14 प्रतिशत वोट हासिल किए थे, वहीं टीएमसी ने 48.02 प्रतिशत के साथ 213 सीट हासिल की थीं। इस बार भाजपा भ्रष्टाचार, बेरोजगारी व घुसपैठ को मुद्दा बना कर करीब 6 प्रतिशत वोट स्विंग की रणनीति पर काम कर रही है।

कोलकाता क्षेत्र चुनौती, एकजुटता का संदेश

हुगली, कोलकाता, हावड़ा, उत्तरी और दक्षिणी 24 परगना का क्षेत्र भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। 108 सीटों वाले इस इलाके में 2021 में टीएमसी ने 98, भाजपा ने 9 और आईएसएफ ने एक सीट जीती थी। अमित शाह ने हालिया दौरे में शमिक भट्टाचार्य, सुवेंदु अधिकारी, सुकांत मजूमदार व दिलीप घोष को एकजुट रहने को कहा है। घोष के साथ उनकी मीटिंग को भी इसी दृष्टि से देखा जा रहा है।

Published on:
07 Jan 2026 03:17 pm
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