नई दिल्ली। केन्द्रीय रेल व आइटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि गति शक्ति विश्वविद्यालय में विनिर्माण प्रौद्योगिकी पर सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस बनना चाहिए। विशेष रूप से विमानन, रेलवे और समुद्री क्षेत्रों में प्रशिक्षण के लिए अलग स्तर की तकनीकी सटीकता और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। उद्योग उन्मुख पाठ्यक्रम छात्रों को स्नातक होने के […]
नई दिल्ली। केन्द्रीय रेल व आइटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि गति शक्ति विश्वविद्यालय में विनिर्माण प्रौद्योगिकी पर सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस बनना चाहिए। विशेष रूप से विमानन, रेलवे और समुद्री क्षेत्रों में प्रशिक्षण के लिए अलग स्तर की तकनीकी सटीकता और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। उद्योग उन्मुख पाठ्यक्रम छात्रों को स्नातक होने के बाद रोजगार के लिए तैयार करने और विविध रोजगार अवसरों तक पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वैष्णव ने यह बातें भारत के परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के अग्रणी विश्वविद्यालय, गतिशक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी) और नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के बीच रेल भवन में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। वैष्णव ने सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस की पहलों से सालाना कम से कम 1,000 छात्र लाभान्वित हो सकते हैं। उन्होंने साकार करने के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता की व्यवस्था की जाएगी।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने कहा कि भारत का विमानन क्षेत्र सालाना 10-12 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। यह गति अगले 15 वर्षों तक जारी रहने की उम्मीद है। उन्होंने जेवर हवाई अड्डे के हालिया उद्घाटन का उदाहरण देते हुए कहा कि यह राजमार्गों, रेलवे, बंदरगाहों और हवाई अड्डों के बीच निर्बाध मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी स्थापित करने के दृष्टिकोण के अनुरूप विकास की गति को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि गतिशक्ति विश्वविद्यालय इस एकीकृत दृष्टिकोण का प्रतीक है, जो विभिन्न लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों को एकजुट करता है। इस दौरान डीजीसीए महानिदेशक फैज अहमद किदवई और जीएसवी कुलपति प्रो. मनोज चौधरी, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष सतीश कुमार और केंद्रीय नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा सहित रेलवे और नागरिक उड्डयन के अन्य शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे।